"उपभोक्ताओं के समक्ष वैश्विक चुनौतियां" विषयक गोष्ठी सम्पन्न

                 (विशाल मोदी) 

 बस्ती (उ.प्र.) । उपभोक्ता दिवस की पूर्व संध्या पर कलेक्ट्रेट परिसर बस्ती में रसोई गैस उपभोक्ता कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में "उपभोक्ताओं के समक्ष वैश्विक चुनौतियां" विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सत्येंद्र नाथ "मतवाला" जी ने किया।  

मुख्य अतिथि आयुष चिकित्साधिकारी जिला चिकित्सालय बस्ती डाक्टर वी.के. वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को प्रभावित करने के लिए तरह तरह के विज्ञापन आते हैं, एक से बढ़कर एक आफर्स के बीच लोगों के लिए यह चुनाव करना कठिन हो जाता है कि वास्तव में हमारे लिए लाभकारी क्या है ? यह शाश्वत सत्य है कि लालच बुरी बला है, इसलिए लोगों को चाहिए कि अपनी पसीने की कमाई को बहुत ही सोच समझ कर खर्च करें, जब भी खरीदारी करें तो पक्की रसीद अवश्य लें। 
साहित्यकार दुर्गेशनन्दन "माणिक" ने कहा कि जुलाई 2020 में सरकार ने उपभोक्ता कानून में बड़ा बदलाव करके उपभोक्ताओं को और मजबूत बनाया है, लोगों को चाहिए कि समझदारी व सावधानी से ही खरीदारी करें, सामानों पर अनिवार्य रूप से छपने वाले निर्माण तिथि और उत्पाद के निष्प्रयोज्य होने की यानि Exp. तिथि अवश्य देखें, जिससे उचित मूल्य पर अधिक गुणवत्ता वाले सामानों की खरीदारी की जा सके। 

कार्यक्रम के आयोजक उपभोक्ता हितों के लिए सदैव संघर्ष शील अधिवक्ता कृष्ण कुमार उपाध्याय, एडवोकेट ने कहा कि उपभोक्ताओं की खामोशी खतरनाक है, पेट्रोल पम्पों पर घटतौली सामान्य बात हो गई है, अधिकारी भी ध्यान नहीं देते हैं, इसका समाधान ढूढना होगा, रसोई गैस के बढते दामों नें सामान्य परिवारों का बजट गड़बड़ा दिया है, राजनैतिक दल तो हमारे लिए लड़ते हैं परन्तु हम अपनी लड़ाई के लिए आगे नहीं आते, यह प्रवृत्ति बदलनी होगी, नहीं तो उपभोक्ताओं के शोषण का सिलसिला जारी रहेगा, उपभोक्ता आयोगों में बढते परिवाद उपभोक्ताओं की जागरूकता को प्रदर्शित करते हैं परन्तु इतना ही पर्याप्त नहीं है।

अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में मतवाला ने कहा कि उपभोक्ता बाजार का बादशाह होता है, उसे अत्यन्त सावधानी पूर्वक कार्य करना चाहिए, जब भी बाजार में जाए तो इत्मिनान से ही खरीददारी करें, शिक्षित उपभोक्ता, सजग उपभोक्ता, सफल उपभोक्ता ही बाजारवाद की चकाचौंध से बच सकते हैं, हमें ध्यान रखना होगा कि कोई भी घाटे का कारोबार नहीं करता है, बाजार की मेहरबानी हमारे ऊपर यूं ही नहीं होती है, किसी न किसी बहाने उपभोक्ताओं की जेब से रुपये निकालना ही बाजार का उद्देश्य होता है, अपनी जरुरत के सामान ही खरीदें, सर्वोत्तम चुनने के बहुत से तरीक़े हैं, जिन्हें प्रत्येक उपभोक्ता को अपनाना चाहिए।

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