स्वतंत्रता आंदोलन में गिरफ्तार होने वाली राजस्थान की पहली महिला अंजना देवी चौधरी : आजादी का अमृत महोत्सव

 

               !! देश की आज़ादी के 75 वर्ष !! 

"आज़ादी का अमृत महोत्सव" राजस्थान की पहली महिला स्वतन्त्रता सेनानी जिन्हें स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लेने के कारण गिरफ्तार किया गया था। वे बिजौलिया में 500 महिलाओं के जुलूस का नेतृत्व करते हुए गिरफ्तार की गयी थीं और बाद में उन्हीं महिलाओं के साथ अवैध रूप से गिरफ्तार किए गए किसानों को अँग्रेजों की कैद से छुड़वाकर स्वतन्त्रता आन्दोलन का बिगुल बजाया था। महान स्वतन्त्रता सेनानी और लेखिका हैं "अंजना देवी चौधरी

                                   प्रस्तुति - शान्ता श्रीवास्तव

63 - अंजना देवी चौधरी एक महान स्वतन्त्रता सेनानी और लेखिका थीं। उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लेने के साथ साथ एक लेखिका के तौर पर भी लोगों को जागरूक किया था। आज़ादी के आन्दोलन के उस दौर में क्रान्ति के साथ साथ साहित्यकारों ने भी जनचेतना बढाने में अहम योगदान दिया था। उनका जन्म सीकर जिला के श्रीमाधोपुर में हुआ था और विवाह महान स्वतन्त्रता सेनानी और राजस्थान सेवा संघ के कार्यकर्ता रामनारायन चौधरी से हुआ था। वह राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की अनुयायी और गाँधीवादी साहित्य की प्रकाशक थींं। ब्रिटिश शासन का विरोध करने के लिए उन्हें दो बार जेल जाना पड़ा था। अपने पति की प्रेरणा से वे 20 वर्ष की आयु से ही कांग्रेस के कार्यों में लग गयीं तथा पर्दा प्रथा व आभूषण का त्याग कर दिया था। वे प्रथम काँग्रेसी महिला थीं जिसने सामन्ती अत्याचारों के विरूद्ध विद्रोह किया था तथा गिरफ्तार और निर्वासित हुई थींं। उन्होंने 1921 से 1924 ई. तक मेवाड़ व बूँदी राज्यों की महिलाओं में राजनीतिक चेतना जागृत की और समाज सुधार तथा सत्याग्रह की ज्योति जलायी थी। जिस कारण उन्हें गिरफ्तार करके बूँदी राज्य से निर्वासित कर दिया गया था। उन्होंने बिजौलिया में 500 महिलाओं के जुलूस का नेतृत्व करते हुए गिरफ्तारी दी और बाद में अवैध रूप से गिरफ्तार किए गए किसानों को रिहा कराया था।

राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित श्रीमती अंजना देवी चौधरी ने चित्तौड़गढ के बेंगु (मेवाड़) में भी उन्होंने सत्याग्रही किसान महिलाओं में जागृति पैदा करने उन्हें सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। अंजना देवी को "नमक सत्याग्रह" के दौरान 6 महीने की सज़ा हुई थी तथा 1930 में "सविनय अवग्या आन्दोलन" में हिस्सा लेने के लिए भी दो बार जेल जाना पड़ा था। उन्होंने भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने के लिए लोगों को शिक्षित और प्रोत्साहित भी किया था। जिसका असर हुआ कि लोगों ने स्वतन्त्रता आन्दोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। वे 1932 से 1935 तक राष्ट्रीय आन्दोलनों में भाग लेने के कारण जेल गयीं। सन् 1937 में उन्होंने डूंगरपुर राज्य में भीलों की सेवा की पिछड़ों के उत्थान के साथ ही उन्हें शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया। अपने पति रामनारायन और अन्य प्रमुख सदस्यों के साथ उन्होंने राजस्थान सेवा संघ का भी गठन किया था। सन् 1939 से 1942 ई. तक उन्होंने "सेवाग्राम आश्रम" में रहकर बापू के कार्यक्रमों में भाग लिया। वे पाँच वर्ष तक "भारत सेवक समाज" के महिला सूचना विभाग के संचालन में व्यस्त रहीं। चाहे हरिजोनोद्धार का कार्य रहा हो अथवा अन्य रचनात्मक कार्य उन्होंने अपने स्वतन्त्रता सेनानी पति का भी भरपूर साथ दिया। उनके कंधे से कंधा मिलाकर वे जीवनपर्यन्त जन-सेवा एवम् राष्ट्र के निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करती रही थीं। 27अप्रैल 1981 को उनका निधन हो गया। वे समस्त रियासती जनता में गिरफ्तार होने वाली पहली महिला थीं।

 आइए हम महान स्वतन्त्रता सेनानी एवम् प्रेरणाश्रोत महान लेखिका श्रीमती अंजना देवी चौधरी जी को प्रणाम करें! सादर नमन! भावभीनी श्रद्धान्जलि! जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम! भारत माता जी की जय!

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शान्ता श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ये बार एसोसिएशन धनघटा (संतकबीरनगर) की अध्यक्षा रह चुकी हैं। ये बाढ़ पीड़ितों की मदद एवं जनहित भूख हड़ताल भी कर चुकी हैं। इन्हें "महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, कन्या शिक्षा, नशामुक्त समाज, कोरोना जागरूकता आदि विभिन्न सामाजिक कार्यों में योगदान के लिये अनेकों पुरस्कार व "जनपद विशिष्ट जन" से सम्मानित किया जा चुका है।

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