बस्ती कलेक्ट्रेट और विकास भवन में मनाई गई अम्बेडकर जयंती

                          (विशाल मोदी) 

बस्ती (सू.वि.उ.प्र.)। भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर कलेक्ट्रेट तथा विकास भवन सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण किया गया तथा गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें बाबा साहेब के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब द्वारा तैयार भारतीय संविधान का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। हमें उनकी समता, समानता और न्याय की भावना पूरे संविधान में परिलक्षित होती है। उनके द्वारा दिए गए संविधान के आदर्शों पर चलकर देश ने विभिन्न क्षेत्रों में पर्याप्त विकास किया है और वंचित, शोषित, पीड़ित एवं गरीब व्यक्तियों को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विषमता से निकालकर गरिमा पूर्ण जीवन प्रदान किया है। जिलाधिकारी ने कहा कि बाबासाहेब ने शिक्षा प्राप्त करके अन्याय, अभाव और अज्ञानता को दूर करने का मार्ग प्रशस्त किया है क्योंकि उन्होंने भी विषम परिस्थितियों में ज्ञान प्राप्त कर समर्थ बनने का कार्य किया।

  उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने अभाव एवं कठिनाइयों के बीच सफलता प्राप्त की थी, इसलिए उन्होंने भारतीय समाज की कुरीतियों एवं समस्याओं को समझ कर उसके निदान का रास्ता भी निकाला। भारतीय संविधान में उन्होंने जहां एक ओर अधिकारों की चर्चा की है वहीं दूसरी ओर नागरिकों के कर्तव्य को भी जोड़ा है, जिससे कि प्रत्येक नागरिक प्रेरित होकर देश और समाज की सेवा कर सके। 
गोष्ठी को संबोधित करते हुए अपर जिलाधिकारी कमलेश चंद ने कहा कि बाबासाहेब ने संविधान के माध्यम से एक नागरिक को समानता और न्याय का अवसर प्रदान किया। उनका मानना था कि अवसरों में समानता तथा न्याय देकर ही समाधान निकल सकता है। गोष्टी को उप जिलाधिकारी गिरीश कुमार झा तथा मोहन प्रकाश ने भी संबोधित किया। गोष्ठी का संचालन अशोक मिश्र ने किया। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट के विभिन्न अनुभागों के सहायक तथा सूर्यलाल, नाजिर मुज्तबा उपस्थित रहे।
 विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि बाबासाहेब ने विषम परिस्थितियों में जीवनयापन किया लेकिन शिक्षा के माध्यम से उन्होंने सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया, अर्थशास्त्र जैसे कठिन विषय में उन्होंने पीएचडी की तथा आजाद देश के पहले कानून मंत्री बने। उन्होंने देश को संविधान प्रदान करके आजाद भारत के विकास की नीव रखा, जिसका पालन करके आज भी देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। विविधतापूर्ण धर्म, जाति, वर्ग, संप्रदाय, भाषा, बोली, जीवन शैली को देखते हुए सभी को स्वीकार होने वाला संविधान तैयार करना एक कठिन चुनौती उनके सामने थी, जिसका उन्होंने सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
  उपायुक्त एनआरएलएम रामदुलार ने उनका बचपन से लेकर कानून मंत्री बनने तक के जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाबासाहेब ने 9 भाषाओं में 32 डिग्री हासिल की, उन्होंने सेना में कार्य किया, बाद में प्रोफेसर बने तथा आजादी की लड़ाई में भाग लिया। उन्होंने बहुत सी किताबें लिखी, पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया और भारतीय संविधान के रूप में उन्होंने अपना सर्वोत्कृष्ट योगदान किया। समाज कल्याण अधिकारी श्रीप्रकाश पांडे ने कहा कि यद्यपि कि उन्होंने जीवन में बहुत सी विषम परिस्थितियों का सामना किया परंतु उन्होंने कभी भी प्रतिशोध के भाव से कार्य नहीं किया। अपर समाज कल्याण अधिकारी लालजी यादव ने कहां की बाबासाहेब के संविधान से देश मजबूती से आगे बढ़ा। उपायुक्त मनरेगा संजय शर्मा ने सामाजिक सहिष्णुता स्थापित करने मे बाबासाहेब के योगदान की चर्चा किया। इस अवसर पर सहायक अभियंता लघु सिंचाई डॉ. राजेश कुमार, संदीप वर्मा, उमेश, रामलाल, देवेंद्र सिंह एवं विकास भवन के कर्मचारी गण उपस्थित रहे।

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