महिला नेत्री द्वारा भौजाई का उत्पीड़न, घर से भगाकर पुलिस को घेरने की तैयारी

                             (नीतू सिंह) 

बस्ती (उ.प्र.)। रोजी रोटी के सिलसिले में बाहर रह रहे भाई की पत्नी को प्रताड़ित कर रही बहनों और पति के भाईयों द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न से तंग आकर घर छोड़ने को मजबूर महिला की शिकायत को गम्भीरता से लेना पुलिस को भारी पड़ने लगा है। पुलिस के सख्त तेवर के आगे अपनी गलतियां छिपाने के लिए दो बहनों ने तिरिया चरित्तर का दांव चला है और पुलिस को आरोपित करते हुए खुद को बचाने के लिए कई पासे फेंक दिए, जिससे पुलिस दबाव में आ जाए और वे भौजाई को घर से बाहर निकाल फेंके। इधर उधर दरख्वास्त देने के साथ ही घड़ियाली आंसुओं के सहारे इन्होंने मीडिया को सबसे आसान और कारगर हथियार के रुप में इस्तेमाल किया। इनकी करतूत तब उजागर हुई जब इनकी प्रताड़ना के कारण दस दिनों से घर छोड़ने को मजबूर पीड़ित भौजाई को पुन: अपने ही घर में नहीं घुसने दिया और डरा धमकाकर भगा दिया। भौजाई को प्रताड़ित और अधिकारियों को गुमराह करने वाली ननद कांग्रेस की नेता बताई जा रही है।

मामला बस्ती शहर कोतवाली क्षेत्र के गिदही बुजुर्ग का है। यहां के विजय विश्वकर्मा की पत्नी सुनीता कुमारी ने 24 सितम्बर को अपनी नन्द कंचन, नीलम और पति के भाई अजय व विनय पर पति की गैर मौजूदगी में घर से बेदखल करने की नीयत से मारन पीटने, कुत्ते से कटवाने और घर से भगा देने की गुहार पुलिस से लगाई। मुकामी जिला अस्पताल चौकी पुलिस ने शुरूआती छानबीन में दोषी पाये जाने पर पीड़ित सुनीता की ननद कंचन, नीलम, देवर अजय व विनय को कड़ी फटकार लगाते हुए सुनीता को घर में रहने देने और उत्पीड़न किये जाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। लेकिन तीनों अपनी जिद पर अड़े रहे और भौजाई को घर से भगाकर ही दम लिया। मजबूरन सुनीता ने मायके में जाकर शरण ली। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पैंतरे बदले और सीनाजोरी दिखाते हुए एसपी से लेकर मानवाधिकार और महिला आयोग तक चिट्ठियां लिख डालीं।
 सुनीता ने पुलिस को दिये ताजा प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसके पति विजय रोजी रोटी के सिलसिले में बाहर रहते हैं। उसकी ननद कंचन पति को छोड़कर मायके में रहती है और अपने पालतू कुत्ते से सुनीता और बच्चों को कटवाती है। मना करने पर मारती पीटती है और दूसरी ननद नीलम को अपने तरफ से बुलाकर प्रताड़ित करती है और देवर अजय व विनय उसका साथ देते हुए सुनीता को भगाकर घर पर कब्जा करना चाहते हैं।
सुनीता ने बताया कि 24 सितम्बर को उन चारों लोगों ने उसे मारपीट कर घर से भगा दिया था और भयभीत होकर जान बचाकर वह मायके चली गई थी। सात सितम्बर शुक्रवार को वह फिर गिदही बुजुर्ग में अपने घर रहने आई, तो चारों लोगों ने उसे घर में घुसने नहीं दिया और डरा धमका कर भगा दिया। अब देखना यह है कि पुलिस मजबूर सुनीता को न्याय दिला पाएगी या दबंग ससुरालियों के झूठे प्रार्थना पत्रों के आगे घुटने टेक देगी।

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