जन्म जन्मांतर के पुण्य से मिलता भागवत कथा का संयोग : कुंडल शास्त्री

 

भागवत अद्भुत ग्रंथ है,4 मंत्रो की व्याख्या 18 हजार श्लोकों में की गई है - आचार्य कुंडल शास्त्री

                       (बृजवासी शुक्ल) 

हर्रैया (बस्ती)। भागवत कथा मनुष्य के जीवन में अमृत के समान है। यह सुखद संयोग जन्म जन्मांतर के पुण्य के उदय होने से ही प्राप्त होता है। भागवत कथा साक्षात परब्रह्म का स्वरुप है। यह उद्गार प्रख्यात कथा व्यास आचार्य कुंडल शास्त्री जी महराज अयोध्या धाम ने शनिवार को छावनी थाना क्षेत्र के मल्लूपुर ग्राम में श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराते हुए श्रोताओं के सम्मुख कही।

कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद् भागवत अद्भुत ग्रंथ है, इसमें केवल चार मंत्रो की व्याख्या 18 हजार श्लोकों में किया गया है, श्रीमद् भागवत कथा को गणेश जी ने लिखा है, भागवत कथा को सुनने के लिए लिखा है कि इसे केवल अधिकारी श्रोताओं को ही सुनाया जाना चाहिए ऐसा होने से भागवत कथा को सुनने का परिणाम लाखों गुना बढ़ जाता है। जो गोविन्द के चरणों का अनुरागी उसका जीवन धन्य हो जाता है। कथा श्रवण के दौरान निद्रा नही आनी चाहिए। माता पार्वती को कथा के दौरान निद्रा आ गई थी, उसका परिणाम हम सभी लोग जानते हैं। मनोयोग पूर्वक कथा का श्रवण करने से तोता का भी उद्धार हो गया।
कथा के पूर्व कथा के मुख्य यजमान अनिरुद्ध मिश्र ने कथा व्यास आचार्य कुंडल शास्त्री का माल्यार्पण किया। कथा व्यास आचार्य श्री ने व्यास पीठ की मान वंदना करते हुए कथा का शुभारंभ किया। कथा श्रवण करने से धर्मानुरागी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्र, प्रवीण मिश्र, पुरोहित राहुल तिवारी, संजय मिश्र, सुधांशु मिश्र, रामेंद्र शुक्ल, कार्तिक मिश्र, विराट मिश्र, विरंच शांडिल्य, सरगम मिश्र, कृतिका मिश्रा, स्वाति मिश्रा, राम शंकर ओझा एवं राजन मिश्र के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजुद रहे।

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