नारद मोह और श्रीराम जन्म ने मोह लिया दर्शकों का मन : बस्ती में रामलीला के तृतीय वर्ष का प्रथम दिवस

 श्रीराम लीला महोत्सव में नारद मोह का मंचन, श्रीराम जन्म होते ही बजी बधाईयां

                        (बृजवासी शुक्ल) 

बस्ती (उ.प्र.)। कामदेव पर विजय प्राप्त कर मारे अभिमान के तीनों लोकों में अपनी प्रशंसा का स्वयं बखान कर रहे ब्रह्मर्षि नारद का अभिमान भंग करने के लिए श्रीहरि विष्णु ने जो लीला रची और विश्व मोहिनी स्वयंवर में उनके अभिमान को खण्डित किया तो पहले ही दिन बस्ती की रामलीला अपने पूरे रौ में आ गई। बस्ती जिले के 17 विद्यालयों के 500 बच्चों की उत्कृष्ट प्रस्तुति ने दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखा।

बस्ती जिले में सनातन धर्म संस्था और श्रीरामलीला महोत्सव आयोजन समिति द्वारा आयोजित श्रीरामलीला का यह तीसरा वर्ष है। इस वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि से एकादशी तिथि (27 अक्टूबर से 4 नवम्बर तक 2022) तक रामलीला का आयोजन किया गया है। सनातन धर्म संस्था द्वारा तृतीय वर्ष आयोजित 09 दिवसीय श्रीराम लीला महोत्सव का आरम्भ विद्वान ब्रह्मणों द्वारा मंगलाचरण और गणेश वन्दना से हुआ।
शास्त्रोचित दीप प्रज्ज्वलन जिले के पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव व उनकी पत्नी डॉ. आकांक्षा द्वारा किया गया। नारद मोह, विश्व मोहिनी स्वयंबर, रावण जन्म, पृथ्वी की करूण पुकार लीला का मंचन गजाधर सिंह अंगद सिंह एकेडमी हर्रैया के बाल कलाकारों द्वारा किया गया। कलाकारों द्वारा किये मंचन ने दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में इंडियन पब्लिक स्कूल के बाल कलाकारों ने दशरथ शोक, पुत्रेष्ठि यज्ञ ,भगवान राम जी का जन्म, मुनि आगमन रावण के अत्याचार से त्रस्त धरती का वर्णन करने के साथ ही श्रीराम जन्म के कारकों को मंचित किया।
व्यास राजाबाबू पाण्डेय ने दर्शकों को बताया कि मोह से कोई मुक्त नहीं है। श्रीनारद के अहंकार का दमन श्री विष्णु ने किया जिससे नारद तत्व की मर्यादा सुरक्षित रहे। बताया कि अत्याचार जब-जब बढता है तो श्री हरि विष्णु विविध रूपों में अवतार लेकर धरा को अत्याचार से मुक्ति दिलाते हैं। श्रीराम लीला का आरम्भ श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती से आरम्भ हुआ।
लीला स्थल पर श्रीराम का जन्म होते ही बधाईयां बजने लगी। समूचा पांडाल ‘ भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।। लोचन अभिरामा तनु घनश्याम निज आयुध भुज चारी।‘ के सामूहिक स्वरों से गूंज उठा। तत्पश्चात प्रसाद के रूप में सोठौंरा का वितरण हुआ, समिति की ओर से बच्चों में खिलौने वितरित किये गये। गुरु वशिष्ठ की धन्य भूमि पर बाल कलाकारों द्वारा जो दिव्य मंचन किया गया , यह मंचन श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न जैसी विभूतियों के अवतरण का साक्षी बना।शत्रुघ्न प्रसाद दूबे, योगेश शुक्ल, अरविंद पाल, पवन कसौधन,आदि ने आरती उतारी। आयोजन की उपादेयता पर सुभाष शुक्ल ने प्रकाश डाला। संचालन बृजेश सिंह मुन्ना ने किया।
कार्यक्रम संयोजन में अखिलेश दूबे, पंकज त्रिपाठी, आशीष शुक्ल, अनुराग शुक्ल, हरीश त्रिपाठी, कैलाश नाथ दूबे, जॉन पाण्डेय,डा. वीरेन्द्र त्रिपाठी, रमेश पाल सिंह, कर्नल के सी मिश्र, डॉ वीरेंद्र त्रिपाठी, सन्तोष श्रीवास्तव, कात्यायिनी दूबे, अविनाश त्रिपाठी, राहुल त्रिवेदी, राम सिंह, उदयभान सिंह, अंकित, सी ए अभिषेक मणि त्रिपाठी, अभय त्रिपाठी, अंकित त्रिपाठी, पवन, अमन त्रिपाठी, राहुल त्रिवेदी, भोलानाथ चौधरी, सौरभ के साथ ही बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। इसके साथ साथ इस अद्वितीय ऐतिहासिक मंचन को देखने के लिए 500 से अधिक दर्शक देर रात तक उपस्थित रहे।

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