दीपावली पर गरीबों के घर खुशियां प्रदान कर रहा "योगक्षेम महिला उत्कर्ष सेवा कोऑपरेटिव मल्टीपर्पज सोसायटी लि."

 

                         (मिहिर कुमार शिकारी) 

आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए "वोकल फ़ॉर लोकल" को बढ़ावा देने का पर्व है - मंगला गुप्ता

गुरुग्राम (हरियाणा)। दीपावली के शुभ अवसर पर "दि योगक्षेम महिला उत्कर्ष सेवा कोऑपरेटिव मल्टीपर्पज सोसायटी लिमिटेड" एवं "उत्कर्ष प्रयास स्कूल" द्वारा गुरुग्राम में झारसा गाँव के गरीब बस्तियों में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों को खाने पीने का राशन का सामना, नए कपड़ों के साथसाथ पटाखों का भी वितरण किया गया। साथ ही बच्चों के लिए मिठाई बांटी गई।

इस अवसर पर दि योगक्षेम सोसायटी की अध्यक्षा मंगला गुप्ता जी ने बताया कि सोसायटी के द्वारा "सहयोग किट" वितरण करने पर गरीबो के चेहरे में काफी खुशियां देखने को मिली इनकी खुशी से हमे खुशी प्राप्त हुई, गरीबो की खुशियों का ध्यान रखते हुए योगक्षेम कोऑपरेटिव सोसायटी का उद्देश्य था कि सब की तरह गरीब परिवार भी अच्छा कपड़ा पहन सके और सभी के भांति वह भी दीपावली खुशियाँ के साथ अच्छे से मना सके।सुखी-संपन्न लोग अपने घरों को रोशन करने और खुशी मनाने का यह मौका कभी नहीं छोड़ते, लेकिन कभी आपने सोचा है कि गरीबों के घर कैसे मनाई जाती होगी दीपावली ,आप सभी जनमानस से योगक्षेम सोसायटी निवेदन करता है ऐसा काम करे कि अपने घर के साथ-साथ दूसरों के घर भी दिवाली पर खुशियां आए, इसके लिए छोटी ही सही पर कोशिश हम सब को करनी चाहिए।दीपावली रोशनी खुशहाली का परंपरागत त्यौहार है, हमें सौहार्दपूर्ण माहौल में धूमधाम से मनाना है। मिट्टी का दिया जलाना है एक भी गरीब परिवार के चेहरे में निराशा न रहे। खुशियां मनाई और जोर शोर के साथ खूब फटाखे फोड़े।
योगक्षेम कोऑपरेटिव सोसायटी और उत्कर्ष प्रयास स्कूल हर दुःख सुख के साथ हिन्दू समाज के साथ खड़ा है खड़ा रहेगा ! कुल मिलाकर इन पांच दिनों की तैयारी में जहा समाज का एक व्यक्ति, एक-एक समूह सक्रिय होता हैं, एक जूट होता हैं, एक दूसरे के लिए उपयोगी बनता हैं,यही सोच आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए "वोकल फ़ॉर लोकल" को बढ़ावा देने का पर्व है। वही इनके समापन के ये पांच दिन व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार की समृद्धि, पशु पक्षियों, वन,पर्वत की समृद्धि और इन सब को एक सूत्र में पिरोने का उत्सव है यह पाँच दिवसीय दीपोत्सव।
 इस सहयोग किट वितरण कार्यक्रम में उत्कर्ष प्रयास स्कूल की संस्थापिका स्वर्णलता पाण्डेय(पूजाजी)ने कहा कि हम हंमेशा समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति को समाज के साथ जोड़ने की इस मुहिम में हंमेशा आगे रहते है और भविष्य में भी रहेगे।आगे उन्होंने कहा कि हम लगातार जरूरतमंद लोगों की मदद करने के साथ साथ उनके बच्चों की पढ़ाई लिखाई का भी काम करते रहेंगे और अपने परिवार से पहले समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के साथ सर्वप्रथम इस त्योहार को मनाना चाहिए और उसी तरीके से हमें गरीबों के साथ दीपावली पर्व धूमधाम से मनाना चाहिए।तभी हम सही मायनों में अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व मनाया है वह सार्थक होगा।आगे पूजाजी ने दीपावली और गाय का महत्व बताते हुए कहा की दीपावली पर्व में पांच दिनों में गौमाता से संबंधित तीन प्रमुख व्रत, पर्व और उत्सव भी होते हैं जिसमें गौवस्त द्वादशी, गौविरात्र और गोवर्धन पूजा, दीपावली का पर्व गौ-उपासना से भी जुड़ा हुआ है,जुड़ता भी क्यों न जहाँ दीपावली भारतीय संस्कृति एवं हिन्दू धर्म का सब से बडा त्यौहार है तो हमारी गाय माता भी इस संस्कृति एवं धर्म की अभिन्न अंग हैं।भारतीय संस्कृति में गाय को माता के समान प्रतिष्ठा प्रदान की गई हैं।उसे लक्ष्मी, रुद्राणी,ब्रह्माणी आदि देवियों के समकक्ष माना गया है।भविष्य पुराण, स्कन्द पुराण, महाभारत आदि में गाय के सभी अंगों में देवताओं का निवास कहा गया है।अतः दीपावली के इस पावन अवसर पर हम सभी को गौमाता की सुरक्षा का संकल्प लेना चाहिए।
 इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से खुश्बू गुप्ता, ऋषिका पाण्डेय, शाश्वत पाण्डेय ने स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीपक और घर की सजावट के लिए सामान खरीद कर घरेलू बाजार को प्रोत्साहित करने के लिए और ऑनलाइन शॉपिंग और बड़ेबड़े मॉल में से इस दीपावली पर्व पर खरीदी नहीं करने का सबको संदेश दिया और आगे कहा कि सहयोग किट वितरण का मुख्य उद्देश्य अंतिम पायदान के लोगों के घरों में भी उजाला फैलाना है,वैसे परिवार जो दीपावली जैसे त्यौहार पर भी दीपक खरीदने में असमर्थ हैं उनतक हम लोग दीपक उपलब्ध करा कर उनके घरों में भी उजाला फैलाना चाहते हैं, इसके साथ ही मिट्टी के दीयों का उपयोग करने से कुम्हारों के लिए नये रोजगार का सृजन होगा।हमें स्वदेश में बनाए हुए दीयों का प्रयोग कर विदेशी-चाइनीज उत्पादों जैसे लाईट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करके बहिष्कार का संकल्प लिया है।इस अवसर पर स्कूल की बच्चियों ने दीपावली के गानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया और उनका उत्साह बढ़ाने के लिए झारसा गाँव की महिलाएं और गणमान्य व्यक्तियों के साथ साथ बच्चों के मातापिता आदि सभी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

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