मण्डलायुक्त ने किसानों को बांटे तोरिया बीज किट, जेडी ने दिये उन्नत खेती के टिप्स

 

                       (शान्ता श्रीवास्तव)

बस्ती (उ.प्र.)। मण्डलायुक्त गोविंद राजू एनएस द्वारा कृषकों को तोरिया का मिनी किट वितरण किया गया है। वितरण किये गये किट में (दो किलोग्राम पैकिंग में) तोरिया की पी. टी. 508 प्रजाति का उन्नत बीज किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। मण्डलायुक्त गोविंद राजू एनएस ने बस्ती सदर विकास खंड के नौ किसानों को किट का वितरण किया है। उन्होंने किसानों से इस शार्ट टर्म (कम समय में तैयार होने वाली) तोरिया बीज का प्रयोग कर लाभ उठाने की अपील की है। यह बीज कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है।

संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मण्डल अविनाश चन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि मण्डलायुक्त गोविंद राजू एनएस द्वारा बस्ती सदर ब्लाक के चमरौहा सियरापार के लालजी चौधरी पुत्र सुरेन्द्र प्रसाद, गिरजेश पुत्र राम किशोर, सूसीपार के राधेश्याम पुत्र कन्हैया, भागीरथी पुत्र रमाकांत, लकड़ा निवासी हरीराम पुत्र राम धनी चननी सियारोबास निवासी शेषनाथ चौधरी पुत्र सत्य नरायन, मिठाई लाल पुत्र गंगादीन, विनोद कुमार पुत्र हरिराम एवं मिश्रौलिया निवासी श्रीचन्द्र पुत्र सतीराम को तोरिया (प्रजाति - पीटी - 508) का मिनीकिट (02 किग्रा. पैकिंग) का वितरण किया गया।
   जेडी एग्रीकल्चर एसी त्रिपाठी ने कृषकों को तोरिया की अधिक पैदावार लेने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी हैं। उन्होंने कहा कि मिट्टी पलट हल से जुताई के बाद बुआई लाइन में करें। भूमि जनित रोगों से बचाव के लिए ट्राइकोडर्मा 2 प्रतिशत डब्ल्यू पी की 2.5 किग्रा. प्रति हेक्टेयर 50 से 60 किग्रा. सड़ी गोबर की खाद में मिलाकर नमी रखते हुए एक सप्ताह के पश्चात भूमि की जुताई के समय मिट्टी में मिला दिया जाए। दो किग्रा. प्रति एकड़ की दर से तोरिया की लाइन में बुआई करें। सिंचित क्षेत्रों में 100 किग्रा. नाइट्रोजन, 50 किग्रा. फास्फोरस प्रति हेक्टेयर देना चाहिए। श्री त्रिपाठी ने कहा कि फास्फेट का प्रयोग सिंगल सुपर फास्फेट के रुप में अधिक लाभदायक होता है, क्योंकि इसमें 12 प्रतिशत गंधक की उपलब्धता होती है। फास्फोरस की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा अन्तिम जुताई के समय तथा नत्रजन की शेष मात्रा पहली सिंचाई (बुवाई के 25 से 30 दिन बाद) टॉप ड्रेसिंग के रुप में देना चाहिए।
जेडी एजी ने बताया कि बीज से बीज की दूरी 30 सेमी. और बुआई 3 - 4 सेमी गहराई में कतारबद्ध करनी चाहिए। बुआई के 15 दिनों के अंदर घने पौधौं को निकालकर पौधे से पौधे की दूरी 10 - 15 सेमी कर देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि खरपतवार नष्ट कर करने के लिए 3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर पेन्डीमेथिलीन 30 प्रतिशत ईसी का प्रयोग बुआई के तीन दिन के अंदर करना चाहिए। माहो का प्रकोप होने पर मोनोक्रोटोफास 0.75 लीटर तथा क्वीनालफास 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर से उपचारित कर देना चाहिए। जब 75 प्रतिशत फलियां सुनहरे रंग की हो जायं तो फसल को काटकर सुखाकर व मंड़ाई करके बीज अलग कर लेना चाहिए। इस तरह किसान भाई बेहतर ढंग से तोरिया (लाही) की खेती करके अधिक पैदावार कमा सकते हैं।

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