प्लास्टिक से छुटकारा दिला सकते हैं मिट्टी के बर्तन : मंगला गुप्ता

गांव की मिट्टी की सोंधी खुशबु के साथ कुम्हार द्वारा बनाये यह बर्तन आपको प्लास्टिक से छुटकारा दिला सकते हैं : मंगला गुप्ता

                     (हरियाणा ब्यूरो रिपोर्ट) 

 गुरुग्राम (हरियाणा)। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में मिट्टी के बर्तनों के खुदाई के दौरान मिले अवशेषों से पता चलता है कि उस समय पर शिल्प कला अच्छी तरह से उन्नत था। भारतीय मिट्टी के पात्र के उपयोग का अनुमान हड़प्पा युग से लगाया जा सकता है। पूरे भारत से मिट्टी के बर्तन बनाने, हस्तनिर्मित और पहिया फेंकने के प्रमाण मिलते हैं। मिट्टी के बर्तनों और चीनी मिट्टी के बर्तन के रूपमें मिट्टी के खिलौने को आकार देने और उसे पकाने की कला सदियों से आधुनिक समय तक विकसित और कायम रही हैं।

उपरोक्त उदगार गुरुग्राम में सेक्टर 82 में आयोजित एक कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित दि योगक्षेम महिला उत्कर्ष सेवा कोऑपरेटिव मल्टीपर्पज सोसायटी लिमिटेड की अध्यक्षा मंगला गुप्ता ने अपने हाथों से मिट्टी का दीपक बनाने के साथ व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष पूर्ण कर चुका है और देश में "सहकार से समृद्धि", "आत्मनिर्भर भारत" और "स्वावलंबी भारत" की राष्ट्रव्यापी मुहिम स्वदेशी और घरेलू उत्पाद एवं उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही है। इसी श्रृंखंला में कुछ सामाजिक संगठन भी शामिल होकर अपना योगदान दे रहे हैं। इस उपलक्ष्य में गुरुग्राम में "मिट्टी की खुशबू राष्ट्रीय मुहिम" संस्था के हीरा अमित रोहिल्ला द्वारा कुम्हार परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से हरियाणा के गुरुग्राम शहर में चलाई जा रही हैं। इस मुहिम को जन साधारण तक पहुंचाने के लिए और जनजागृति लाने के लिए एक लाईव वर्कशॉप, बच्चों और गुरुग्राम की जनता के लिए वाटिका इंडिया नेक्स्ट में आयोजित किया गया।
मंगलाजी ने कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधित हो सकती है। क्योंकि हमारे दैनिक जीवन में इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकतर उपयोगी सामान प्लास्टिक, फाइबर और अन्य पदार्थों से बने होते हैं, जो न केवल हमारे शरीर के लिए बल्कि पूरे पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हैं। बाजार से सब्जी लाने वाले थैले से लेकर उस सब्जी को धोने वाला बर्तन और फिर उस सब्जी को खाने वाला बर्तन यह सभी हमारे घर में प्लास्टिक से बने होते हैं, जिसका नुकसान अनंत है। प्लास्टिक के बर्तनों को अधिक समय तक उपयोग करने के बाद कैंसर जैसी बीमारियों के होने की संभावना भी प्रबल हो जाती है। लेकिन मजबूरी बस हम अपने दैनिक जीवन में इन सामानों को उपयोग करते आ रहे हैं। नए भारत में स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर लोग चिंतित हैं और अलग-अलग तरह के विकल्प की तलाश में है। एक ऐसा ही विकल्प मिट्टी से बने बर्तन हैं, जो पूर्ण रूप से हमें प्रकृति के निकट रखता है और साथ ही इसके इस्तेमाल से ना ही शरीर को किसी तरह का नुकसान है और ना ही प्रकृति को। मिट्टी का बर्तन बनाने के लिए पहले एक विशेष प्रकार की मिट्टी ढूंढी जाती है। जो अत्यंत टिकाऊ और स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होती है। इस मिट्टी को अच्छे से साफ करने के बाद बर्तन बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। एक बार बर्तन बन जाए तब उसे घिसकर खूबसूरत आकार दिया जाता है और फिर आग की भट्टी में तब तक जलाया जाता है जब तक यह पत्थर की तरह सख्त ना हो जाए। मिट्टी के अनेकों बर्तन अब बाजार में उपलब्ध हैं। मिट्टी के बर्तनों को बनाने वाले कुम्हार अब हर तरह का बर्तन बना रहे हैं, जिसमें कप, ग्लास, प्लेट और यहां तक की पकाने के बर्तन जैसे प्रेशर कुकर और हांडी भी बनाया जाता है। इनकी मजबूती किसी भी चीनी मिट्टी वाले बर्तन से कम नहीं होती है। आजकल मिट्टी से बने चाय के कुल्हड़ ट्रेंड में हैं। मोड़ - चट्टी पर पहुंचते ही युवाओं का पहला पसन्द मिट्टी से बने चाय के बर्तन होते हैं, जो उन्हें अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। चाय के स्वाद के अनुसार साथ ही मिट्टी की सोंधी महक उसका स्वाद और भी बढ़ा देती है।

           ग्रामीणस्तर पर आत्मनिर्भरता

मिट्टी के बर्तन के ट्रेंड में आने से अनेकों फायदे हैं। जहां एक तरफ आम जनता को प्लास्टिक से छुटकारा मिलने के साथ ही स्वास्थ्य के भी फायदे मिल रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण स्तर पर इससे बृहद स्तर पर रोजगार के अवसर भी नजर आते हैं। भारत के अलग - अलग कोने में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले हजारों संख्या में कारीगर अभी काम कर रहे हैं, जो अपने साथ साथ अपने परिवार वालों का भी भरण पोषण आसानी से कर पा रहे हैं। मिट्टी के बर्तन का प्रयोग अपने आप में प्लास्टिक का अल्टरनेटिव है। वृहद स्तर पर इसके उपयोग मात्र से ही प्लास्टिक का बहिष्कार अपने आप हो जाएगा और पर्यावरण काफी हद तक प्लास्टिक मुक्त हो पाएगा। दूसरी तरफ इन बर्तनों के इस्तेमाल से हम चाइना जैसे दूसरे देशों पर आश्रित रहने के बजाय खुद के देश में बनने वाले प्रोडक्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देंगे और स्वदेशी भारत को सशक्त करने में सफल होंगे।

 इस अवसर पर दि योगक्षेम कोऑपरेटिव सोसायटी की उपाध्यक्षा स्वर्णलता पाण्डेय (पूजाजी) ने अपने हाथों से दीपक बनाते हुए उपस्थित लोगों को मिट्टी के बर्तनों की उपयोगिता बताई। उन्होंने उसके इस्तेमाल करने का तरीका बताते हुए कहा कि आजकल हमारे पास कई तरह के नॉनस्टिक पैन या बर्तन हैं, लेकिन मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के अपने फायदे हैं। जिनके बारे में हम में से बहुत से लोगों को जानकारी नहीं है। मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने से न केवल कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं बल्कि यह हमारे खाना पकाने की प्रक्रिया को भी आसान बनाता है और साथ ही हमें अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन देता है। इसके कई स्वास्थ्य लाभों के कारण, आयुर्वेद भी मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने का सुझाव देता है।इसके अलावा मिट्टी के बर्तन में खाना बनाना एक सामान्य बर्तन में पकाने से बहुत बेहतर है क्योंकि यह हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार करता है।

    क्यों करना चाहिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने की शुरुआत करने का सबसे ठोस कारण यह है कि यह आपके भोजन में हानिकारक धातुओं की कमी नहीं करता है।मिट्टी के बर्तन न केवल आपके और आपके भोजन के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छे हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के स्वास्थ्य लाभ बहुत बड़े हैं। सबसे पहले, वे आपके भोजन में लोहा, कैल्शियम, फॉस्फोरस, सल्फर और मैग्नीशियम जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व शामिल करते हैं जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के लिए भी तेल की आवश्यकता नहीं होती है और इसलिए, यह देखा गया है कि मिट्टी के बर्तनों में पकाया गया भोजन किसी अन्य बर्तन में तैयार भोजन की तुलना में वसा में कम होता है।

        किफायती और सुलभ हैं मिट्टी के बर्तन 

कई दुकानें हैं जो मिट्टी के बर्तन बेचती हैं जिससे आपको इसे खरीदने में कोई परेशानी नहीं होगी। किसी भी अन्य प्रकार के खाना पकाने के बर्तन की तुलना में मिट्टी के बर्तन काफी सस्ते होते हैं। आप अपनी जेब बिना ढीले किये भी इन्हें आसानी से विभिन्न आकारों में खरीद सकते हैं।

          भोजन के पोषण को बनाए रखते हैं

मिट्टी के बर्तन भोजन के पोषण को बनाए रखते हैं जो आमतौर पर अन्य प्रकार के बर्तनों में खो जाता है।मिट्टी के बर्तनों में थर्मल जड़ता मांस को लंबे समय तक कोमल और नरम रखने के विशेष गुण होते है जिससे वह जल्दी सख्त नहीं होता।

                 कम तेल का उपयोग

इसकी गर्मी प्रतिरोध और धीमी गति से खाना पकाने के कारण, भोजन अपने सभी तेलों और नमी को बरकरार रखता है, नतीजतन आपको अपने भोजन को नमी प्रदान करने के लिए अतिरिक्त तेल और वसा की आवश्यकता नहीं होगी।

       खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं मिट्टी के बर्तन 

मिट्टी के बर्तनों की धीमी गति से खाना पकाने और झरझरा प्रकृति के कारण, बर्तन में नमी और सुगंध बिना किसी पोषक तत्व को खोए रहती है, जिससे यह स्वादिष्ट होता है।इसके अलावा, इसमें खाना बनाने से मिट्टी का स्वाद आपके खाने को और स्वादिष्ट बनाता है जो कि आपको किसी अन्य बर्तन में नहीं मिल सकता है।

   ऐसे करें मिट्टी के बर्तनों का उपयोग

हर बार मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करने से पहले आपको इसे पानी में भिगोने की ज़रूरत होती है (अगर बिना पका हुआ हो) कम से कम 10-15 मिनट के लिए इसको ठंडे पानी में डुबो दें। फिर यह खाने पकाने के लिए तैयार है। यह भी याद रखें कि मिट्टी के बर्तन तापमान परिवर्तन के प्रति संवेदनशील होते हैं और आसानी से टूट जाते है इसलिए इसे कभी भी अत्यधिक तापमान में न पकाए। कार्यक्रम में गुरुग्राम के गणमान्य नागरिक, अन्य क्षेत्रों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर मिट्टी के बर्तन को लेकर अपने विचार व्यक्त किये और अपने घर का हिस्सा बनाने क संकल्प लिया।

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