बेल्लारी सिद्धम्मा ने झण्डा सत्याग्रह में फहराया था राष्ट्रीय ध्वज : आजादी का अमृत महोत्सव

                !! देश की आज़ादी के 75 वर्ष !! 

"आज़ादी का अमृत महोत्सव" में आज चर्चा कर रहे हैं भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए मैसूर राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गयी पहली महिला स्वतन्त्रता सेनानी जिन्होंने शिवपुर झण्डा सत्याग्रह में "राष्ट्रीय ध्वज" फहराया था। इनका नाम है "बेल्लारी सिद्धम्मा"

                                 प्रस्तुति - शान्ता श्रीवास्तव

59 - बेल्लारी सिद्धम्मा एक बहादुर महिला स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थीं। उनका जन्म धारवाड़ जिला के हावेरी तालुक के डूंडासी गाँव में वर्ष 1903 को हुआ था। उनके पिता का नाम कोट्टेगे बसप्पा था। एक व्यवसायी होते हुए भी उनकी दिलचस्पी स्वतन्त्रता संग्राम में थी। वे अपनी बेटी के लिए समाचार पत्र पत्रिकायें लाते थे। उन्होंने ही अपनी बेटी बेल्लारी सिद्धम्मा को राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत कर राष्ट्रवादी विचारों के लिए प्रेरित किया था।

बेल्लारी सिद्धम्मा का विवाह एक स्वतन्त्रता सेनानी मुरूगप्पा से हुआ था जो एक कट्टर राष्ट्रवादी और महात्मा गाँधी जी के अनुयायी
थे। जिससे उनके लिए स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेना पूरी तरह से आसान हो गया था। एक घटना ने बेल्लारी सिद्धम्मा को झकझोर कर रख दिया था। वह था अँग्रेजों द्वारा मल्लगप्पा धनशेट्टी और उनके साथियों को दी गयी मौत की सजा। राज्य के नेताओं के प्रयासों के बावजूद उन्हें फाँसी पर लटका दिया गया था। उस घटना ने अनेकों युवाओं को स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया था। उसी समय बेल्लारी सिद्धम्मा ने घोषणा की थी कि अँग्रेजों को भारत से खदेड़ दिया जाना चाहिए और किसी भी कीमत पर स्वतन्त्रता प्राप्त की जानी चाहिए। बेल्लारी सिद्धम्मा लम्बे समय तक घर की चाहरदीवारी से बाहर नही निकली थीं लेकिन वह एक प्रेरक वक्ता और एक अच्छी आयोजक बन गयी थीं। उन्होंने दावणगेरे और चित्रदुर्ग के सभी पड़ोसी गाँवों का दौरा कर महिलाओं व पुरूषों को सम्बोधित किया और उनका सहयोग माँगा। महिला स्वयंसेवकों को संगठित करने में उत्कृष्ट कार्य करने के कारण जल्द ही उन्हें मैसूर राज्य में एक प्रमुख राज्यस्तरीय नेता के रूप में पहचाना जाने लगा। 1930 के दशक तक मैसूर राज्य में स्वतन्त्रता संग्राम अपने चरम पर था। सरदार वीरनगौड़ा पाटिल, केएफ पाटिल, नागम्मा पाटिल, एस निजलिंगप्पा और टी. सिद्धलिंगैया के साथ उनके जुड़ाव ने उन्हें अपनी गतिविधियों को बढाने में सक्षम बनाया। अप्रैल 1938 में उन्होंने शिवपुरा में काँग्रेस पार्टी के सम्मेलन में भाग लिया। वह रियासत मैसूर राज्य काँग्रेस का पहला सत्र था। उस अधिवेशन में "राष्ट्रीय ध्वज" फहराने वाले नेताओं को 12 अप्रैल 1938 को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
 बेल्लारी सिद्धम्मा ने अपने सुन्दर स्वर में "वन्दे मातरम" गीत गायाा, जिसके कारण वहाँ एकत्रित सभी लोगों के बीच प्रमुखता से उभरीं। टी. सुनन्दम्मा, यशोधरा दासप्पा, बेल्लारी सिद्धम्मा और सुबम्मा जोइस जैसी महिलाओं ने शिवपुर कार्यक्रम में घोषणा की कि वे परिणाम भुगतने और पुरूषों को पीछे छोड़कर झंडा फहराने के लिए तैयार हैं। इसे न केवल महिलाओं का उत्कृष्ट साहस माना जाता था बल्कि स्वतन्त्रता के लिए पुरूषों के साहस को पार करने वाला निर्णय भी माना जाता था। 13 अप्रैल 1938 को बेल्लारी सिद्धम्मा ने "राष्ट्रीय ध्वज" फहराया और अगले ही पल उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया और एक महीने के लिए जेल में कैद कर दिया गया था। वह मैसूर राज्य में झण्डा फहराने वाली तथा मैसूर राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गयी पहली महिला थीं। पूरे राज्य में ख़बर फैल गयीी। जनता की प्रतिक्रिया बेल्लारी सिद्धम्मा के लिए थी कि "एक बहादुर महिला वास्तव में एक बहादुर महिला एक आदर्श सत्याग्रही!" शिवपुर झण्डा सत्याग्रह राष्ट्रीय स्वतन्त्रता के संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने पूरे कर्नाटक और मैसूर राज्य की व्यापक यात्रा की। मुख्य रूप से उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों को केन्द्रित किया। उन्होंने महिलाओं को कताई बुनाई करने की सलाह दी और खादी को लोकप्रिय बनाया। उन्होंने युवाओं और बुज़ुर्गों को शराब पीने की आदत से दूर करने की भी कोशिश की थी। वह वास्तव में एक जन नेता थीं। उन्होंने 1938 में चित्रदुर्ग के "अरण्य सत्याग्रह" में भी भाग लिया था। सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में भी उन्होंने राजनीतिक रूप से सक्रिय भागीदारी की। पुलिस उन पर नज़र रखी हुई थी लेकिन वे कई मौकों पर पुलिस को बेवकूफ बनाने में कामयाब रहीं और गिरफ्तारी से बचते हुए भूमिगत श्रमिकों की मदद करती रही थीं। वह भूमिगत कार्य करने में भी बहुत सक्रिय थीं। महिलाओं और राष्ट्र के लिए उनकी सेवा के सम्मान में उन्हें एक "ताम्र पत्र" से सम्मानित किया गया था।

आइए बहादुर महिला स्वतन्त्रता सेनानी बेल्लारी सिद्धम्मा जी से प्रेरणा लें! प्रणाम करें! सादर नमन! भावपूर्ण श्रद्धान्जलि! जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम! भारत माता की जय!

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शान्ता श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ये बार एसोसिएशन धनघटा (संतकबीरनगर) की अध्यक्षा रह चुकी हैं। ये बाढ़ पीड़ितों की मदद एवं जनहित भूख हड़ताल भी कर चुकी हैं। इन्हें "महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, कन्या शिक्षा, नशामुक्त समाज, कोरोना जागरूकता आदि विभिन्न सामाजिक कार्यों में योगदान के लिये अनेकों पुरस्कार व "जनपद विशिष्ट जन" से सम्मानित किया जा चुका है।

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