रानीवेलु नचियार ने चूर किया था अंग्रेजों का घमण्ड : आजादी का अमृत महोत्सव

 

             !! देश की आज़ादी के 75 वर्ष !!

 "आज़ादी का अमृत महोत्सव" में आज हैं भारत की पहली महिला स्वतन्त्रता सेनानी जिन्होंने अँग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत का झण्डा बुलन्द कर अँग्रेजों का घमंड चूर चूर कर दिया था! भारत की गुमनाम महिला स्वतन्त्रता सेनानियों में से एक हैं - "रानी वेलु नचियार" 

                                 प्रस्तुति - शान्ता श्रीवास्तव

61 -  रानीवेलु नचियार दक्षिण भारत में शिवगंगा रियासत की बहादुर रानी भारत की गुमनाम महिला स्वतन्त्रता सेनानी जो भारत में अँग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाली तथा उन्हें हराने वाली पहली भारतीय रानी थीं जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई से काफी पहले अँग्रेजों के छक्के छुड़ाये थे। जब अँग्रेजों ने उनके पति को मार डाला और शिवगंगा रियासत की सम्पत्ति पर कब्ज़ा कर लिया तो उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के गोला बारूद हथियार वाले घर में आत्मघाती हमले की योजना बनाकर उड़ा दी और सात वर्षों की लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद अपनी रियासत अपनी सम्पत्ति वापस ले ली थी। तमिलनाडु में उन्हें "वीरमंगई" (बहादुर रानी) के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म रामनाथपुरम (शिवगंगा साम्राज्य) में 03 जनवरी 1730 को हुआ था। पिता का नाम चेल्लामुत्थु विजयरागुनाथ सेथुपति तथा माता का नाम रानी मुथथल नचियार था। वे अपने माता पिता की इकलौती संतान थीं। 

 रानी वेलु नचियार को एक राजकुमार की तरह ट्रेनिंग दी गयी थी। वो घुड़सवारी, तीरंदाजी और विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों में प्रशिक्षित युद्ध कला में पारंगत थीं तथा अँग्रेजी, उर्दू, फ्रेंच भाषायें जानती थीं। 1746 में जब वे 16 वर्ष की हुईं तो उनका विवाह शिवगंगा रियासत के राजा "मुथुवदुगनाथ पेरियावुदयाथेवारी" के साथ कर दिया गया। उनकी एक पुत्री हुई नाम बेल्लाची रखा गया। लगभग दो दशकों तक शांति से राज करने के बाद अँग्रेजों की नज़र उनके राज्य पर पड़ी। सन् 1772 में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की अँग्रेजी सेना और अरकोट के नवाबों की सेनाओं ने मिलकर शिवगंगा रियासत पर आक्रमण कर दिया। कलैयार कोली युद्ध नाम से इस युद्ध में रानी वेलु नचियार के पति और कई अन्य सैनिक मारे गए। ये युद्ध उस समय के सबसे विध्वंशक युद्धों में से एक था। अँग्रेजी सेना ने किसी को नहीं बख्शा था। बच्चे, बूढे, महिलायें सभी को मौत के घाट उतार दिए थे। रानी वेलु नचियार और उनकी पुत्री वेल्लाची सिर्फ सकुशल बचकर निकलने में कामयाब हुई थीं। वे शिवगंगा के अपने अंगरक्षक मारूथु भाइयों (वेल्लैमारूथ और चिन्नामारूथ)  और कुछ अन्य लोगों की मदद से तमिलनाडु के ही डिंडीगुल जिले के पास एक जगह विरूप्पाची में गोपाल नायकर के यहाँ आकर रहने लगी। वहाँ रहकर रानी वेलु नेे अँग्रेजों से अपना राज्य वापस लेने की योजनायें बनायी। कई शासकों से मैत्री की। वे किसी भी कीमत पर अँग्रेजों को अपनी मिट्टी से खदेड़ने पर आमादा थी। डिंडीगुल जिले में रहने के दौरान उनकी मुलाक़ात मैसूर के राजा हैदरअली से हुई। उन्होंने उनसे उर्दू भाषा में बातचीत करकेेेे और अपने साहस का परिचय देकर हैदरअली को चौंका दिया था। हैदरअली ने भी अँग्रेजों से युद्ध करने में रानी की हर सम्भव मदद करने को कहा और अपनी दोस्ती का विश्वास दिलाने के लिए अपने महल के अन्दर एक मंदिर भी बनवाया तथा रानी को अपने सैनिकों आदि का सहयोग देकर मदद भी की। रानी वेलु नचियार हैदरअली और गोपाल नायकर की मदद से धीरे धीरे अपनी सेना इकट्ठा करने लगीं और अपने मारूथु भाइयों व अपनी बेटी के साथ शिवगंगा वापस आ गयीं और अपने भाइयों को मंत्री व सेनापति बनाकर खुद अपने पति की जगह शासन करने लगी। सन् 1780 ई. में रानी वेलु नचियार और अँग्रेजों का आमना सामना हुआ। रानी वेलु नचियार को अँग्रेजों का गोला बारूद कहाँ रखा है उस स्थान की जानकारी मिल गयी थी। रानी ने इतिहास में दर्ज पहला सुसाइड बम हमला करने की योजना बनाई थी। रानी की सेना कमांडर और वफ़ादार कुइली ने इस योजना के लिए खुद का बलिदान देने के लिए आगे बढीं और खुद पर घी डाला आग लगायी और अँग्रेजों के गोला बारूद, हथियार घर में कूद पड़ी! इस तरह से कुइली ने खुद का बलिदान देकर अँग्रेजों के अस्त्र शस्त्र को नष्ट कर उनकी सेना को कमज़ोर कर दिया और वीरगति को प्राप्त हुई। कुइली को भारतीय इतिहास में पहला सुसाइड बम हमलावर भी माना जाता है। कुइली को अनेक इतिहासकार रानी वेलु नचियार की गोद ली हुई पुत्री भी मानते हैं। रानी वेलु ने कुइली की स्मृति में  उनके नाम से महिलाओं की एक सेना टुकड़ी बनायी।
रानी अपनी कुशल राजनीति और युद्ध कलाओं से बहुत से लोगों के अन्दर देश प्रेम की भावना भर दी। सात सालों तक अँग्रेजों से भयंकर युद्ध लड़ने के बाद आखिरकार अँग्रेजों को शिवगंगा छोड़कर भागना ही पड़ा और दुबारा अँग्रेज उनके राज्य की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखे। 25 दिसम्बर 1796 में 66 वर्ष की आयु में रानी वेलु नचियार का निधन हो गया। लेकिन रानी ने अँग्रेजों के विरूद्ध शिवगंगा और तमिलवासियों में देश प्रेम की जो लौ जलाई थी, वो जलती रही। 31दिसम्बर 2008 को भारत सरकार ने रानी वेलु नचियार के सम्मान में पाँच रूपये का एक डाक टिकट जारी किया था। रानी वेलु नचियार ने न सिर्फ अँग्रेजों से युद्ध किया था बल्कि उन्हें हराया भी और अपनी रियासत अपनी सम्पत्ति दुबारा वापस ली थी। 

आइए भारत की पहली महिला स्वतन्त्रता सेनानी तमिलनाडु राज्य के शिवगंगा रियासत की रानी वेलु नचियार जी से हम प्रेरणा लें! उन्हें प्रणाम करें! सादर नमन! विनम्र श्रद्धान्जलि! जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम! भारत माता जी की जय! 

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शान्ता श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ये बार एसोसिएशन धनघटा (संतकबीरनगर) की अध्यक्षा रह चुकी हैं। ये बाढ़ पीड़ितों की मदद एवं जनहित भूख हड़ताल भी कर चुकी हैं। इन्हें "महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, कन्या शिक्षा, नशामुक्त समाज, कोरोना जागरूकता आदि विभिन्न सामाजिक कार्यों में योगदान के लिये अनेकों पुरस्कार व "जनपद विशिष्ट जन" से सम्मानित किया जा चुका है।

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