पैगम्बर और सहाबा ने भी मनाया था इमाम हुसैन का गम

 

                             (नीतू सिंह) 

- कर्बला के शहीदों की याद मनाना पैगम्बर की है सुन्नत, पहली मोहर्रम को इमामबाड़ा शाबान मंजिल में हुआ कार्यक्रम

बस्ती (उ.प्र.)। पहली मोहर्रम को शाबान मंजिल, गांधी नगर में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना हैदर मेंहदी ने कहा कि पैगम्बर और उनके सहाबा ने भी हुसैन का गम मनाया था। कर्बला के शहीदों की याद मनाना पैगम्बर की सुन्नत है।

मौलाना ने कहा कि मस्जिदे-नबवी में एक रोज पैगम्बर बैठे हुए थे, उनकी गोद में छोटे नवासे हुसैन बैठे हुए थे। इसी बीच जिबरील फरिश्ता नाजिल हुए और फरमाया कि आपके नवासे को आपकी उम्मत के कुछ लोग तीन रोज तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर देगी। यह सुनकर नबी रोने लगे। नबी ने जब अपने सहाबा को यह बात बताई तो आसुंओं से उनकी दाढ़ी भीग गई। मस्जिदे-नबवी में सिसकियां गूंजने लगी। यह बात जब पैगम्बर की बेटी हजरत फात्मा को मालूम हुई तो उनका भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मौलाना ने कहा कि कर्बला की घटना के बाद इमाम हुसैन के बेटे इमाम जैनुल आब्दीन अपने घर में मजलिस का आयोजन करते थे, जिसमें कर्बला की घटना का बयान होता था और उसमें शामिल लोग आंसू बहाते थे। मोहर्रम का चांद देखते ही नबी के घर में शोक का माहौल हो जाता था। यही सिलसिला आज भी जारी है। इस मौके पर मोहम्मद रफीक, सफदर रजा, जीशान हैदर रिजवी, शम्स आबिद, हाजी अनवार काजमी, वासन, शम्स आबिद, राजू, जैन, तकी हैदर सहित अन्य मौजूद रहे।

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