केरल की पहली महिला सांसद महान स्वतंत्रता सेनानी एनी मस्कारेने : आजादी का अमृत महोत्सव

            !! देश की आज़ादी के 75 वर्ष !!

 "आज़ादी का अमृत महोत्सव" में आज एक ऐसी गुमनाम महिला स्वतन्त्रता सेनानी व साहसी राजनेता की बात कर रही हूँ जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में निडरता के साथ भाग लिया था। उनकी सक्रियता के कारण कई बार गिरफ्तारियां और कारावास हुए। वह केरल की पहली निर्वाचित महिला सांसद पहली महिला राज्यमंत्री बनने के साथ ही देश के संविधान सभा की सदस्य भी थीं। उनका नाम है "एनी मस्कारेने" 

                                  प्रस्तुति - शान्ता श्रीवास्तव

71 - एनी मस्कारेने केरल की महान महिला स्वतन्त्रता सेनानी, वकील, साहसी राजनेता तथा त्रावणकोर राज्य काँग्रेस में शामिल होने वाली पहली महिला और स्वतंत्र भारत में साल 1951 में हुए पहले आम चुनाव में केरल के तिरूवनंतपुरम लोक सभा क्षेत्र से (निर्दलीय) स्वतन्त्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीतकर संसद में पहुँचने वाली केरल की पहली महिला सांसद थीं। वह पहली राज्यमंत्री भी थीं। भारत के संविधान को मूल रूप देने वाली समिति में 15 महिलाएं भी शामिल थीं। उनमें एक नाम एनी मस्कारेने का भी है। उन्होंने संविधान निर्माण में योगदान देने के साथ साथ भारतीय समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जन्म - तिरूवनंतपुरम के एक अत्यन्त शिक्षित लेनिन कैथोलिक परिवार में 06 जून 1902 को हुआ था। उनके पिता का नाम गैब्रियल मस्कारेने था। वह त्रावणकोर राज्य में एक सरकारी अफसर थे।

एनी मस्कारेने पढ़ाई में बचपन से ही मेधावी थीं। साल 1925 में उन्होंने महाराजा कॉलेज तिरूवनंतपुरम से डबल एम.ए की डिग्री इतिहास और अर्थशास्त्र में प्राप्त की थी। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह श्रीलंका चली गयी थीं, जहाँ उन्होंने सीलोन के एक कॉलेज में प्राध्यापक के पद पर काम किया था। वहाँ से लौटने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और डिग्री हासिल की। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा लेते हुए उन्होंने त्रावणकोर राज्य के समन्वय में अहम भूमिका निभाई थी। एनी मस्कारेने अकम्मा चेरियन और पट्टुम थानु पिल्लई के साथ भारतीय राष्ट्र के भीतर रियासतों की स्वतन्त्रता और एकीकरण के लिए आन्दोलनों के नेताओं में से एक थीं। फरवरी 1938 में जब राजनीतिक दल त्रावणकोर राज्य काँग्रेस का गठन हुआ तो वह त्रावणकोर राज्य से काँग्रेस में शामिल होने वाली पहली महिलाओं में से एक थीं और त्रावणकोर राज्य काँग्रेस कार्यकारिणी का हिस्सा बनने वाली भी पहली महिला बनी थीं। पार्टी का लक्ष्य त्रावणकोर के लिए एक ज़िम्मेदार सरकार स्थापित करना था और इसका नेतृत्व पट्टुम थानु पिल्लई ने अध्यक्ष के रूप में किया था। एनी मस्कारेने को कार्य समिति में नियुक्त किया गया था और साथ में प्रचार समिति की भी ज़िम्मेदारी दी गयी थी।

एनी मस्कराने एक निडर महिला थीं। उन्होंने 1938 - 39 में त्रावणकोर सरकार के "आर्थिक विकास बोर्ड" में भी काम किया था। पार्टी कार्य समिति में काम करते हुए उन्होंने त्रावणकोर के दीवान के खिलाफ काँग्रेस के आन्दोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने महाराजा चिथिरा थिरूनल को एक ज्ञापन भेजा था जिसमें उन्होंने सर सी.पी रामास्वामी अय्यर की नियुक्ति को खत्म करने की माँग की थी। उनके दीवान पद पर रहने के दौरान प्रशासन नियुक्तियों और वित्तीय मामलों की जाँच की माँग की थी। अय्यर और उनके प्रशंसकों ने उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई की। एनी मस्कारेने ने खुले तौर पर विधायिका, दीवान और सरकार की आलोचना की थी। उनके बयानों के कारण पुलिस ने भी उन पर हमला किया। उनके घर को तोड़ दिया गया था और सामान को चुरा लिया गया था। उनके ऊपर सरकार के खिलाफ भाषण देने और लोगों को टैक्स न देने के लिए उकसाने जैसे आरोप लगाए गए थे। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने भी उन्हें असंतोष फैलाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था। एनी मस्कारेने पर जलियांवाला बाग कांड का प्रभाव पड़ा और वे स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय हो गयीं। सन् 1937 से 1947 के बीच उन्हें कई बार गिरफ्तार कर जेल में डाला गया था। जेल से बाहर आने के बाद भी वे लगातार सामाजिक मुद्दों को उठाती रहीं। वे सन् 1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन से जुड़ीं। दो साल बाद वह त्रावणकोर स्टेट काँग्रेस की सेक्रेटरी पद के लिए चुनी गयीं। राजनीति में वह एक प्रमुख वक्ता के रूप में उभर चुकी थीं।

इक्कीस फरवरी 1946 को बॉम्बे (मुम्बई) में दिए गए एक भाषण के संदर्भ में एनी मस्कारेने को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने एक पत्र लिखा था "वैसे तो मुझे पता है कि आपका अपनी वाणी पर कोई नियंत्रण नहीं है, और जब आप बोलने के लिए खड़ी होती हैं तो जो आपके दिमाग में आता है आप बोल देती हैं। यदि अख़बार में छपी यह रिपोर्ट सही है तो यह भाषण उसी का एक नमूना है। मैं भाई थानु पिल्लई को एक रिपोर्ट भेज रहा हूँ आप उसे पढ सकती हैं। इस तरह की अभद्र भाषा न तो आपके लिए बेहतर है और न ही त्रावणकोर के गरीब लोगों के लिए। इसके लिए आपने अपने कृत्य से सभी को शर्मसार किया है।" महात्मा गाँधी जी ने त्रावणकोर राज्य के अपने सहयोगी थानु पिल्लई को लिखा था कि उम्मीद है कि मस्कारेने को उनकी ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाएगा। साल 1946 में एनी मस्कारेने संविधान सभा की सदस्य के लिए चुनी गयीं। वह सभा की उन 15 महिलाओं में से एक थीं, जिन्हें भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा गया था। उन्होंने "हिन्दू कोड बिल" की जाँच करने वाली विधान सभा की चयन समिति में भी काम किया था।

जब ब्रिटिश संसद द्वारा भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम 1947 पारित किया गया तो संवैधानिक सभा 15 अगस्त को भारत अधिराज्य (डोमिनियन) की वह सदस्य बन गयीं। सन् 1948 में वह त्रावणकोर कोचीन विधान मंडल के लिए चुनी गयीं। उस दौरान राज्य की स्वास्थ्य मंत्री भी बनीं। काँग्रेस की पुरानी सदस्य होने के बावज़ूद स्वतन्त्र भारत में साल 1951 में हुए पहले आम चुनाव में केरल के तिरूवनंतपुरम क्षेत्र से (निर्दलीय) स्वतन्त्र उम्मीदवार के रूप में उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। जीतकर संसद पहुँचने वाली वह केरल की पहली महिला सांसद भी थीं। उन्न्नीस जुलाई 1963 को तिरूवनंतपुरम में ही 61वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्हें तिरूवनंतपुरम के पट्टूर कब्रिस्तान में दफनाया गया था। साल 2013 में केरल की राजधानी में उनकी एक कांस्य प्रतिमा स्थापित की गयी। जिसका अनावरण तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया था। एनी मस्कारेने एक महान स्वतन्त्रता सेनानी और साहसी राजनेता थीं जिन्होंने कभी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। 

आइए हम महान स्वतन्त्रता सेनानी, वकील और साहसी राजनेता को याद करें उनसे प्रेरणा लें! सादर नमन! भावभीनी श्रद्धान्जलि! जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम! भारत माता जी की जय! 

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शान्ता श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ये बार एसोसिएशन धनघटा (संतकबीरनगर) की अध्यक्षा रह चुकी हैं। ये बाढ़ पीड़ितों की मदद एवं जनहित भूख हड़ताल भी कर चुकी हैं। इन्हें "महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, कन्या शिक्षा, नशामुक्त समाज, कोरोना जागरूकता आदि विभिन्न सामाजिक कार्यों में योगदान के लिये अनेकों पुरस्कार व "जनपद विशिष्ट जन" से सम्मानित किया जा चुका है।

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