महान देशभक्त स्वतंत्रता सेनानी नारायणी देवी वर्मा : आजादी का अमृत महोत्सव

 

              !! देश की आज़ादी के 75 वर्ष !!

 "आज़ादी का अमृत महोत्सव" में आज एक ऐसी महान देशभक्त महिला स्वतन्त्रता सेनानी हैं जिनका पूरा जीवन देश की आज़ादी के आन्दोलन में भाग लेने के साथ साथ नारी शिक्षा एवम् नारी उत्थान के लिए समर्पित रहा। "नारायणी देवी वर्मा" - एक महान राष्ट्रभक्त महिला स्वतन्त्रता सेनानी थीं।

                                 प्रस्तुति - शान्ता श्रीवास्तव

64 - नारायणी देवी वर्मा का जन्म मध्य प्रदेश के सिंगोली गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम रामसहाय भटनागर था। मात्र 12 वर्ष की छोटी सी उम्र में ही उनका विवाह माणिक्यलाल वर्मा से कर दिया गया जो एक प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी थे। उन दिनों राजा ज़ागीरदारों के अत्याचार को देखकर माणिक्यलाल वर्मा ने आजीवन किसानों, दलितों और गरीबों की सेवा करने का संकल्प लिया तो नारायणी देवी वर्मा भी पति के संकल्प में आजीवन उनके साथ रहीं।

 पति माणिक्यलाल के जेल जाने पर परिवार के पालन पोषण के लिए उन्होंने घर मोहल्लों में जाकर लोगों को पढाना एवम् शोषण के खिलाफ महिलाओं को तैयार करने के कार्य किए तथा महिला सहयोगियों के साथ घर घर जागृति संदेश पहुँचातीं और लोगों को नशा प्रथा एवम् बाल विवाह के विरूद्ध आवाज उठाने और संगठित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती थीं। उन्होंने डूंगरपुर रियासत में खड़लाई में भीलों के मध्य शिक्षा प्रसार द्वारा जागृति पैदा करने का कार्य भी किया था। वे सन 1939 में प्रजामण्डल के कार्यों में भाग लेने के कारण जेल गयीं। उसके बाद 1942ई. में "भारत छोड़ो आन्दोलन" में भाग लेने के कारण उन्हें पुन: जेल की सजा हो गयी। सन 1944ई. में वे भीलवाड़ा आ गयीं और महिला शिक्षा एवम् जागृति के लिए भीलवाड़ा में 14 नवम्बर 1944 को "महिला आश्रम संस्था" की स्थापना कर महिलाओं के सर्वांगीण विकास का कार्य अपने हाथों में लिया तथा प्रौढ़ शिक्षा व प्रसूति गृह का संचालन भी किया था। 1952 - 53 ई. में महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करते हुए वे 1970 से 1976 तक राज्यसभा की सदस्य भी रही थीं। उनकी स्मृति में भीलवाड़ा के विजय सिंह पथिक नगर में "नारायणी देवी वर्मा महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय" की स्थापना किया गया। देश की प्रमुख स्वाधीनता सेनानी महिला पूर्व राज्य सभा सदस्य, महिला आश्रम की संस्थापिका नारायणी देवी वर्मा ने आज़ादी के आन्दोलन में भाग लिया तथा उनका पूरा जीवन नारी शिक्षा एवम् नारी उत्थान और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा। बारह मार्च 1977को उनका निधन हो गया।

 आइए हम महान राष्ट्रभक्त महिला स्वतन्त्रता सेनानी महिला सशक्तीकरण की प्रतीक नारायणी देवी वर्मा जी से प्रेरणा लें! उन्हें प्रणाम करें! सादर नमन! भावभीनी श्रद्धान्जलि! जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम! भारत माता जी की जय!

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शान्ता श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ये बार एसोसिएशन धनघटा (संतकबीरनगर) की अध्यक्षा रह चुकी हैं। ये बाढ़ पीड़ितों की मदद एवं जनहित भूख हड़ताल भी कर चुकी हैं। इन्हें "महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, कन्या शिक्षा, नशामुक्त समाज, कोरोना जागरूकता आदि विभिन्न सामाजिक कार्यों में योगदान के लिये अनेकों पुरस्कार व "जनपद विशिष्ट जन" से सम्मानित किया जा चुका है।

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