महान स्वतंत्रता सेनानी रुक्मिणी लक्ष्मीपति अम्माल : आजादी का अमृत महोत्सव

 

                !! देश की आज़ादी के 75 वर्ष !! 

"आज़ादी का अमृत महोत्सव" में आज भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान "नमक सत्याग्रह आन्दोलन" की पृष्ठभूमि में मद्रास प्रेसीडेन्सी में गिरफ्तार होने वाली और जेल की सजा पाने वाली पहली भारतीय महिला स्वतन्त्रता सेनानी हैं - "रुक्मिणी लक्ष्मीपति अम्माल" 

                                    प्रस्तुति - शान्ता श्रीवास्तव

44 - रुक्मिणी लक्ष्मीपति अम्माल प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी समाज सेविका लक्ष्मीपति का जन्म सन 1891 में मद्रास में हुआ था। वे बचपन से ही बहादुर और तेज दिमाग की थीं। उस वक्त लड़कियों की शिक्षा की ओर बहुत कम ध्यान दिया जाता था, किन्तु लक्ष्मीपति के पिता ने उन्हें स्नातक स्तर की शिक्षा दिलाई थी। वे मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज की पहली स्नातक टीम में से एक थीं। उन्होंने हिन्दी, उर्दू, लैटिन और फ्रेन्च भाषाओं का भी ज्ञान प्राप्त किया था। 1920 के दशक में वे महात्मा गांधी, राजगोपालचारी और सरोजिनी नायडू से प्रभावित व प्रेरित होकर ब्रिटिश सरकार के चंगुल से देश को मुक्त कराने के लिए भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में शामिल हो गयीं। वे स्वराज्य संघर्ष और स्वदेशी आन्दोलन की ओर आकर्षित थीं। उन्होंने युवाओं व महिलाओं को न सिर्फ सूत कातने के लिए प्रेरित किया, बल्कि उसके उपयोग को भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में समाज सेवा की। उन्होंने न केवल सामाजिक सुधारों को बढावा देने के लिए कार्य किया बल्कि बाल विवाह जैसे सामाजिक शोषण का विरोध कर महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए भी विशेष बल दिया। उन्होंने साइमन कमीशन के विरोध में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

लक्ष्मीपति ने युवाओं को स्वराज्य आन्दोलन के लिए काँग्रेस के सदस्य के रूप में समान करने के लिए "यूथ लीग ऑफ काँग्रेस" का संचालन किया। कांग्रेस ने उन्हें 1926 में पेरिस में वोट के अधिकार पर "अन्तर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन" में भाग लेने के लिए नियुक्त किया था। 1930 में जब महात्मा गाँधी जी ने "नमक" पर ब्रिटिश सरकार के करों के खिलाफ एक ऐतिहासिक "नमक सत्याग्रह आन्दोलन" शुरू किया था, जो दक्षिण गुजरात में नवसारी जिले के साबरमती आश्रम में चौबीस दिवसीय (24दिनों) तक दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 से 06 अप्रैल 1930 तक चली थी।
लक्ष्मीपति ने नमक सत्याग्रह आन्दोलन एवंं सविनय अवग्या आन्दोलन आदि आन्दोलनों में भाग लिया गिरफ्तार हुईं और जेल की सज़ा पाने वाली पहली भारतीय महिला सेनानी थीं। उन्होंने अपने सभी आभूषण (गहनों) को महात्मा गाँधी जी के "हरिजन कल्याण कोष" (हरिजनोद्धार फंड) में दान दे दिया था। 1940 में वे व्यक्तिगत सत्याग्रह में भी जेल गयी थीं। उन्होंने जब डिप्टी स्पीकर का पदभार ग्रहण किया था और मद्रास विधान सभा में पहुँचकर प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री बनी थीं, तो आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा नीतियों के प्रचार में लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। साल 1951में रुक्मिणी लक्ष्मीपति जी का निधन हो गया। 1997 में महान क्रान्तिकारी और समाजसेविका रुक्मिणी लक्ष्मीपति अम्माल जी की स्मृति में भारत सरकार ने दो रूपये का डाक टिकट जारी कर उन्हें सम्मानित किया।
 आइए हम महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी समाज सेविका रुक्मिणी लक्ष्मीपति अम्माल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करें! सादर नमन! भावभीनी श्रद्धांजलि! जय हिन्द! जय भारत! वन्दे मातरम! भारत माता जी की जय!

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शान्ता श्रीवास्तव वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ये बार एसोसिएशन धनघटा (संतकबीरनगर) की अध्यक्षा रह चुकी हैं। ये बाढ़ पीड़ितों की मदद एवं जनहित भूख हड़ताल भी कर चुकी हैं। इन्हें "महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, कन्या शिक्षा, नशामुक्त समाज, कोरोना जागरूकता आदि विभिन्न सामाजिक कार्यों में योगदान के लिये अनेकों पुरस्कार व "जनपद विशिष्ट जन" से सम्मानित किया जा चुका है।

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