जीतन मांझी के ब्राह्मण भोज में ब्राह्मणों से मारपीट

 

                         (घनश्याम मौर्य) 

पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पटना स्थित आवास पर ब्राह्मणों के एक समूह ने हंगामा किया। सोमवार को जमा हुए ब्राह्मणों ने आरोप लगाया कि भोज के दौरान उनके समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की है। मांझी द्वारा आयोजित किए गए ब्राह्मण-दलित एकता भोज में खाने के लिए बड़ी संख्या में ब्राह्मण इकट्ठा हुए थे।

उन्हें दावत के लिए चूड़ा, दही, तिलकुट (तिल से बनी मिठाई) और सब्जियां परोसी गईं। ब्राह्मणों में से एक ने आरोप लगाया कि मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने आरोप लगाया कि एचएएम के लोगों ने उन्हें और अन्य लोगों को खाना खाने के लिए मजबूर किया, जबकि वे खाना ग्रहण नहीं करना चाहते थे। यह ब्राह्मण भोज 26 दिसम्‍बर सोमवार को आयोजित किया गया था। 

हम वाले खाने को मजबूर नहीं कर सकते : यश राज

ब्राह्मण समुदाय के नेता यश राज ने मांझी के निवास पर कहा, ‘जिस तरह से उन्होंने हमें खाना परोसा, उस पर हमने कड़ी आपत्ति जताई। वे हमें खाना खाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। अगर वे हमारा सम्मान नहीं करेंगे, तो हम वहां खाना क्यों खाएंगे? इसलिए, हमने उनके निवास पर भोज का बहिष्कार किया और बाहर आ गए।’

'सवाल पर भड़के, मांझी के समर्थकों ने की मारपीट'

कई ब्राह्मण नेताओं ने दावा किया कि उनमें से कुछ लोगों ने मांझी से सवाल पूछने के बाद हंगामा शुरू किया। यश राज ने कहा, ‘मांझी ने सशर्त ब्राह्मण - दलित एकता भोज का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने हमारे समुदाय के लोगों पर शर्ते रखीं कि जो लोग मांसाहारी भोजन नहीं करते हैं, शराब नहीं पीते हैं या किसी अपराध में शामिल नहीं हैं, उन्हें भोज के लिए आमंत्रित किया जाता है। हमने मांझी से पूछा कि वह कौन हैं जो लोगों से पूछे कि हम क्या खाते हैं और क्या नहीं। इस सवाल के बाद मांझी के समर्थकों ने हमारे साथ मारपीट की।’

  ब्राह्मणों ने किया भोज का बहिष्कार

स्थिति खराब होने पर राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान समेत कुछ समर्थकों ने ब्राह्मणों से खाना खाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो बातचीत के जरिए मामले का समाधान किया जा सकता है। हालांकि, ब्राह्मणों ने उनकी बात नहीं मानी और उनके साथ भोज का बहिष्कार किया। उन्होंने मांझी पर उन्हें भोज के लिए आमंत्रित करने और उस पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया है। जीतन राम मांझी ने 19 दिसंबर को पटना में दलितों को संबोधित करते हुए ब्राह्मणों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

मांझी ने कहा कि ब्राह्मण हमारे घरों में सत्यनारायण पूजा करते थे, लेकिन वे अपने घरों में खाना नहीं खाते। खाने के बदले हमसे पैसे की मांग करते हैं। यश राज ने 23 दिसंबर को जीतन राम मांझी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। वहीं, उन्होंने कई अन्य लोगों के साथ वहां जाकर सत्यनारायण पूजा (भगवान विष्णु की पूजा) का आयोजन किया और उस दिन उन्होंने दावा किया था कि उनका दल मांझी के घर भोजन करने जाएगा। मांझी ने अपनी अभद्र टिप्पणी के बाद सार्वजनिक रूप से दो बार माफी मांगी और अपने बोल वापस ले लिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह ब्राह्मणों के खिलाफ नहीं बल्कि ब्राह्मणवाद के खिलाफ हैं।
मांझी के ब्राह्मणों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान की चारों तरफ निंदा हो रही है। इस बीच, बिहार भारतीय जनता पार्टी ने इशारों ही इशारों में मांझी पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस की देखादेखी लगभग सभी परिवारवादी पार्टियों की राजनीति हिन्दू समाज के अपमान पर ही टिकी हुई है। पूर्व विधायक रंजन ने कहा कि कांग्रेस और उसकी सहयोगियों के मन में शुरुआत से ही हिंदू समाज के प्रति घृणा का भाव रहा है, इसी वजह से पहले इन्होंने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा किया और बाद में हिन्दू समाज में जातिवाद के जहर को घोलने में लगे हैं।
उन्होंने कहा, ‘इन दलों के लिए हिन्दू धर्म को नीचा दिखाना एक फैशन की तरह हो गया है। कभी यह ब्राह्मणों को गाली देते हैं तो कभी गाय को माता कहने का विरोध करते हैं। इसी तरह कभी यह प्रभु श्री राम को काल्पनिक बताते हैं तो कभी अन्य देवी-देवताओं को गाली देते हैं।’ उन्होंने कहा कि यही लोग जाति विशेष के ठेकेदार बन एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने की साजिश भी रचते हैं। इनके बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि यह पार्टियां धर्म परिवर्तन में लगी विदेशी ताकतों से पैसे खाकर ऐसे बयान देते हैं।

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