बस्ती टेली कंसल्टेंसी के डॉ. का न. गलत, आक्सीमीटर भी खराब, मरीजों का पुरूसाहाल नहीं @ जिला अस्पताल

 

                       (विशाल मोदी) 

बस्ती (उ.प्र.) । स्थानीय जिला चिकित्सालय मरीजों के प्रति उदासीनता और कर्तव्यों से विमुख रहने के लिए पहले से ही जाना जाता है। ऊपर से इस कोरोना काल में यहां की दुश्वारियां कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। हाल ही में रूधौली विधायक संजय जायसवाल के फैक्ट चेक में फेल हुए जिला अस्पताल का एक और अजूबा सामने आया है, जिसमें यहां आक्सीमीटर तक खराब मिला। टेली कंसल्टेंसी के लिए दिये गये ईएनटी डॉ. का न. ही गलत है। प्रश्न यह उठता है कि ऐसे संवेदनशील वक्त में भी यह हास्यास्पद कार्यप्रणाली कब तक चलेगी और क्यों ? व्यवस्था है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही है, ऊपर से तुर्रा यह कि जिम्मेदारों की न तो कोई जवाबदेही दिखती है न ही कोई कार्रवाई होती है। इसे जिम्मेदारों के प्रति सहानुभूति न समझा जाय तो क्या समझा जाय ? आखिर जीरो टोलरेंस की पालिसी किसके लिए है और किस वक्त अपनाई जाएगी।

उ. प्र. माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडलीय मंत्री डॉ. संजय द्विवेदी ने अपने कान में कुछ दिक्कत महसूस होने पर टेली कंसल्टेंसी के दिये गये विशेषज्ञ चिकित्सकों के मो. न. में से टेली कंसल्टेंसी परामर्श सूची के क्रम सं. 19 पर अंकित नाक कान गला विशेषज्ञ डॉ. एस. एस. कन्नौजिया का मो. न. 7310477573 मिलाया, तो पता चला कि यह डुमरियागंज में किसी कबाड़ का काम करने वाले व्यक्ति का न. है, जिसने संजय द्विवेदी से बदतमीजी से बात भी की।
इस शिकायत पर तारकेश्वर टाईम्स ने भी उक्त न. को मिलाया तो बताया गया कि वो डुमरियागंज के उमेश शर्मा का न. है, जो छात्र है। डॉ. द्विवेदी ने मुख्य चिकित्साधिकारी से नम्बरों को चेक करके संशोधित सूची जारी करने की मांग की है। सीएमओ से इस बावत बात करने के लिए तारकेश्वर टाईम्स ने उनके सीयूजी न. पर फोन किया, लेकिन फोन कॉल रिसीव नहीं की गयी। जैसा कि इनके बारे में यह प्रचलित शिकायत है। यानि बातचीत और जानकारी के रास्ते बन्द समझे जायं ?

         (अधिकारियों से बात करते विधायक संजय जायसवाल) 
बीते ग्यारह मई को जिला अस्पताल की दुर्व्यवस्था उस वक्त उजागर हुई थी, जब 309 रूधौली विधानसभा से भाजपा विधायक संजय प्रताप जायसवाल ने वहां की हकीकत जांचने का प्रयास किया। यूं तो वह खुद का कोविड-19 वैक्सीनेशन कराने गये थे, लेकिन वहां की व्यवस्था भी देखने लगे तो चौंकाने वाली स्थितियां नजर आयीं। उन्होंने वीडियो कॉल करके डीएम सौम्या अग्रवाल को दिखाया कि अस्पताल में फर्श पर मरीजों को लेटाया गया है और वार्डों में गंदगी फैली हुई है। उन्होंने सबसे पहले जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर को देखा जहां मरीज जमीन पर पड़े थे। वहीं पर इलाज किया जा रहा है। लेकिन उनको देखने वाला कोई मेडिकल स्टाफ नहीं है। कई मरीजो के परिजनों ने आक्सीजन न मिलने के शिकायत किया। वही वार्ड का आक्सीमीटर खराब था किसी का सही रीडिंग नहीं बता रहा ‌था। विधायक ने अपना आक्सीजन नापा 77 बताया ज‌‌बकि भर्ती मरीज का 99 बता रहा था। जिसको लेकर सीएसएस को मानवीय संवेदना के साथ काम करने की नसीहत दी और कहा कि जिस चीज की कमी हो उसकी सूची दें, जिससे शासन से मांग किया जा सके।
              (जिला अस्पताल में जमीन पर लेटे मरीज) 
वहीं जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को रोज इलाज के लिए कठिनाईयों का समाना करना पड़ रहा है। घंटों इंतजार के बाद मरीज को भर्ती किया जा रहा है। इस पर मरीज तो जैसे तैसे समय काट ले रहे हैं, लेकिन वार्ड और अस्पताल में फैली गंदगी से मरीजों और उनके तीमारदारों की जान जोखिम में रहती है। दैनिक जागरण ने जिला अस्पताल की हालत बयां करते हुए एक चित्र परिचय के साथ फोटो छापी है, जिसमें स्पष्ट है कि प्रशासन बेड और आक्सीजन की उपलब्धता के दावे कर रहा है, लेकिन असलियत यह है कि मरीज अस्पताल में तड़पने को मजबूर हैं और कोई फोन पर रिस्पांस देने वाला नहीं है। थक हार कर प्राईवेट अस्पताल की शरण में जाने को लोग मजबूर हो रहे हैं। 

जिला चिकित्सालय बस्ती कोविड-19 हास्पिटल नहीं है। यहां किसी समस्या से पीड़ित मरीज आते हैं। कोरोना संक्रमण के इस कठिन दौर चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की उदासीनता का शिकार यहां आने वाले मरीजों और तीमारदारों को होना पड़ रहा है। जिससे शासन प्रशासन की व्यवस्था पर जहां प्रश्न चिन्ह लगता है, वहीं सरकारी व्यवस्था से लोगों का भरोसा उठ रहा है और प्राईवेट जगहों पर अपनी जेब कटवाने जाने को भी मजबूर हो रहे हैं। इतना ही नहीं विधायक के इतना सब कुछ करने के बाद भी अस्पताल या जिला प्रशासन की तरफ से वहां की व्यवस्था में सुधार या जिम्मेदारों को किसी तरह की चेतावनी तक की कोई सूचना नहीं मिली है। ऐसे में स्थितियों का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। 

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