कोविड - 19 पर सेक्सुअल हेल्थ का प्रभाव

 

                         (बृजवासी शुक्ल) 

एक अमेरिकी डॉक्टर ने सलाह दी है कि इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सेक्स कीजिए। सिर्फ कहने वाली बात नहीं है। लंबे समय से किए गए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि सेक्स करने के कई फायदे हैं। सेक्स कीजिए, इम्यूनिटी यानी शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी! इस बारे में आपने कभी कोई सलाह पाई है क्या? आपके डॉक्टर ने कभी यह बात कही आपसे? ज़रूर ही नहीं कही होगी। लेकिन एरिजोना के डॉक्टर फेथ कोट्स ने जोर देकर यह सलाह दी है। और इस आत्मविश्वासी डॉक्टर ने अपनी इस सलाह को अपने चैंबर तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे इंटरनेट पर फैला दिया।

कोट्स के टिकटॉक पर एक विडियो बनाया है। उन्होंने अपने 6 लाख 18 हज़ार फॉलोवर्स के सामने इसका खुलासा किया है। उनके एक फैन ने उनसे पूछा था, ‘ऑर्गेज़म हमें बीमार होने से बचाता है, यह सच है या ग़लत?’ जवाब में कोट्स ने विडियो शेयर किया। इसमें वह कहते हैं, ‘सच है! हफ्ते में कम से कम एक-दो बार यौन संबंध बनाने से इम्यून सिस्टम 30 फ़ीसदी बढ़िया काम करता है। यह डॉक्टरों की सलाह है।’ कोट्स ने जो कहा, वह सिर्फ कहने वाली बात नहीं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शोध प्रकाशित हो चुके हैं। उनमें देखा गया है कि सेक्स या स्वास्थ्यकर यौन संबंध के कई फायदे हैं। यह कभी इम्यूनिटी को बढ़ाता है, कभी हार्ट को बढ़िया रखता है और कभी तनाव को कम करके मन को अच्छा कर देता है।

साल 2004 में एक अध्ययन में दावा किया गया था कि हफ्ते में कम से कम दो बार सेक्स करने से शरीर में इम्युनोग्लोबिन ‘ए’ की मात्रा बढ़ती है। यह एक प्रकार की एंटीबॉडी है, जो लार ग्रंथियों, नाक, योनि वगैरह की म्युकस टिशू से इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद पहुंचाती है। हालांकि 2004 के बाद से इस अध्ययन को फिर दोहराया नहीं गया। लेकिन दिल की सेहत और सेक्स के संबंध में कई रिसर्च हो चुकी हैं। जैसे कि 2018 में अमेरिकन जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी में एक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुआ। इसमें कहा गया था कि जो पुरुष हफ्ते में दो बार से ज़्यादा सेक्स करते हैं, उनमें हार्ट अटैक की आशंका उनसे कम रहती है, जो महीने में केवल एक बार सेक्स करते हैं। लेकिन यहां कुछ किंतु-परंतु भी है। जिनके हार्ट में कुछ समस्या है, उन पर सेक्स कोई असर छोड़ेगा या नहीं, सवाल अपनी जगह कायम है। अमेरिकन हार्ट असोसिएशन के एक सुझाव के अनुसार, सेक्स करना उनके लिए सुरक्षित है, जो दिल की बिना किसी तकलीफ के तीन से पांच मेटाबॉलिक इक्विवेलेंट (एमईटी) जितनी एक्सरसाइज कर सकते हैं। किसी शारीरिक परिश्रम के समय जितनी ऊर्जा खर्च होती है, उसे ही मेटाबॉलिक इक्विवेलेंट से मापा जाता है। उदाहरण के लिए कम असर वाली ऐरोबिक एक्सरसाइज में 5 एमईटी ऊर्जा खर्च होती है।

साल 2016 में एक अन्य रिसर्च में दावा किया गया कि जो महिलाएं नियमित सेक्स करती हैं, उनमें हार्ट संबंधी समस्याओं की संभावना कम होती है। हालांकि इस अध्ययन में एक चेतावनी भी थी। अत्यधिक यौन क्रिया कई बार पुरुषों में हार्ट से जुड़ी समस्याएं खड़ी कर सकती है। हालांकि इस तथ्य से पिछली कुछ स्टडी का खंडन होता है। इसलिए अधिकतर लोग ‘सेफ’ रहने की सलाह देते हैं कि अगर किसी पार्टनर को हार्ट की समस्या है तो डॉक्टर की सलाह लेना ही बेहतर है। अध्ययन में कहा गया था, अपने यौन जीवन से संतुष्ट उम्रदराज महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या कम होती है। पुरुषों के लिए यह अच्छी ख़बर नहीं थी। इसका एक दूसरा पहलू है। हाई ब्लड प्रेशर की दवा खाने वाले कई पुरुषों में यौन इच्छा कम देखी गई है। इसके पीछे कारण हाई ब्लड प्रेशर और दवा का असर भी हो सकता है। इसीलिए हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

और कुछ बाते हैं, जहां सेक्स का सकारात्मक योगदान है। 2019 में हुई एक स्टडी में पाया गया कि पार्टनर के साथ घनिष्ठता शरीर में पाए जाने वाले कार्टिसोल हार्मोन के स्तर को सामान्य रखने में मददगार है। कार्टिसोल एक स्टेरॉयड हार्मोन है। जब तनाव बढ़ता है, तब रक्त में इसका स्तर तेज़ी से ऊपर उठ जाता है। सेक्स करने से शरीर में ऑक्सिटोसिन, एंडोर्फिन जैसे ‘फील गुड’ हार्मोन निकलने लगते हैं, जो वास्तव में तनाव कम करने में कारगर हैं। इसलिए इम्यूनिटी बढ़े या न बढ़े, ‘मोडरेट’ सेक्स तानव कम करने में मदद ज़रूर करता है। ऑर्गेज़म के बाद शरीर से प्रोलैक्टिन हार्मोन निकलता है, तो संतुष्टि की भावना लाता है। फिर ऑक्सिटोसिन, एंडोर्फिन तनाव से राहत देते हैं और अच्छी नींद आती है। एक और मामले में वैज्ञानिकों ने सेक्स का अच्छा गुण खोज निकाला है, पुरुषों के प्रोस्टेट कैंसर के बारे में। वैज्ञानिकों ने लंबे समय तक लगभग 30 हज़ार पुरुषों पर रिसर्च की। रिजल्ट बताता है कि जिन पुरुषों का महीने में 6-7 बार वीर्य स्खलन होता है, उनकी तुलना में जिनका महीने में 21 बार वीर्य स्खलन होता है, उनमें प्रोस्टेट कैंसर की संभावना कम रहती है। : श्रोत - नवभारत गोल्ड

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