भगवान राम नेपाली हैं न कि भारतीय


(सुरेश पाण्डेय) 


लखनऊ। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली एक तरफ जहां अपनी कुर्सी बचाने के लिए लगातार तिकड़म कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ वह भारत के खिलाफ भी खूब बयानबाजी कर रहे हैं। चीन की शह पर चल रहे केपी ओली जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए कभी नए नक्शे में भारतीय क्षेत्र को अपना बता रहे हैं तो कभी नेपाल में कोरोना वायरस के प्रसार के लिए भारत से आ रहे लोगों को कसूरवार ठहरा रहे हैं। 



इस बीच, भारत के खिलाफ लगातार भड़काऊ बयान देकर अपनी कुर्सी बचाने की फिराक में लगे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने अजीबोगरीब बयान दिया है। ओली ने कहा कि भगवान राम नेपाली हैं न कि भारतीय। नेपाल की मीडिया ने केपी ओली का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने कहा- "असली अयोध्या नेपाल में है, न कि भारत में। भगवान राम नेपाली हैं न कि भारतीय।" 



केपी ओली ने इससे पहले यह बयान भी दिया था कि नई दिल्ली में उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। उनके इस बयान के बाद सरकार के लोगों ने ही उनके इस बयान पर सवाल खड़ा कर दिया था। ओली यह भी अंदेशा जता चुके हैं कि उनकी और राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की जान को खतरा है।  


प्रचंड ने कहा था, ''प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी कि भारत उन्हें अपदस्थ करने की साजिश रच रहा है, ना तो राजनीतिक रूप से सही है और ना कूटनीतिक रूप से उपयुक्त है।" प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया था कि उन्हे पद से हटाने के लिए दूतावासों और होटलों में विभिन्न तरह की गतिविधियां चल रही हैं।उन्होंने कहा कि देश के मानचित्र को अद्यतन कर उसमें रणनीतिक रूप से तीन भारतीय क्षेत्रों लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को शामिल किए जाने संबंधी उनकी सरकार के कदम के बाद के खेल में कुछ नेपाली नेता भी संलिप्त हैं।


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