दो कोरोना पाजिटिव रिपोर्ट के साथ सुर्खियों में कृष्णा मिशन हास्पिटल


                        (विशाल मोदी) 


बस्ती (उ.प्र.) । नावेल कोरोना वायरस (COVID - 19) के संक्रमण काल में अस्पताल में भर्ती एक महिला की मौत के बाद उसकी रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आने के साथ ही विवादों में आये शहर के प्रतिष्ठित श्री कृष्णा मिशन हास्पिटल आज अस्पताल के दो स्टॉफ की रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आने की सूचना के साथ फिर सुर्खियों में आ गया है। अलबत्ता यह जरूर है कि अस्पताल प्रशासन इस खबर को सिरे से नकार रहा है।         


     स्थानीय बरगदवा में स्थित उक्त चिकित्सालय के दो कर्मचारियों की कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आने की सूचना से हड़कम्प मचा हुआ है। इसमें एक स्वीपर रफीक और नर्स रोशनी सिंह का नाम सामने आ रहा है। विगत दिनों इस अस्पताल में भर्ती एक महिला की मृत्योपरांत रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आयी थी। बता दें कि इस अस्पताल को कोरोना (COVID - 19) के सेम्पलिंग की अनुमति बीते दिनों मिली थी। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अजीज खान ने बताया कि इसके कुछ ही दिनों बाद स्वतंत्र सेम्पलिंग को रोक कर कोविड - 19 कन्ट्रोल रुम की अनुमति प्राप्त लोगों के ही सेम्पल लिए जाने का निर्देश मिला, जिसके अनुसार कार्य किया जा रहा था। डॉ. अजीज ने बताया कि गत 15 जून को कन्ट्रोल रूम की स्वीकृति पर तीस लोगों की जांच करायी गयी थी। जिसमें पचीस हास्पिटल स्टॉफ और पांच अन्य लोग थे। इसमें दो रिपोर्ट पाजिटिव और अट्ठाईस रिपोर्ट निगेटिव आयी हैं। इसके बाद कन्ट्रोल रूम के लोगों ने श्री कृष्णा मिशन हास्पिटल पहुंच कर यहां के सेम्पलिंग रूम (अस्पताल का कमरा न. 8) को सील कर दिया है। पाजिटिव आयी रिपोर्ट पांच अन्य में से हैं। हास्पिटल के किसी कर्मचारी की रिपोर्ट पाजिटिव नहीं है। उन्होंने बताया कि जो रोशनी सिंह पाजिटिव मिली हैं और उन्हें इस अस्पताल में कार्यरत बताया जा रहा है, यह सही नहीं है। वे बड़ेबन के एस. के. सिंह के परिवार की हैं और सम्भवत: नोएडा के किसी अस्पताल में नर्स हैं। रही बात रफीक की तो ये अस्पताल का स्वीपर तो था, पर करीब 55 साल से अधिक का होने के कारण लॉक डाउन - 1 में ही उसे 28 मार्च 2020 को ही सेवा मुक्त कर दिया गया था ।             


बता दें कि मृत्योपरांत पाजिटिव मिली काशीराम आवास कालोनी की निवासिनी महिला कैली अस्पताल में भर्ती थी, उसे बीआरडी मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया गया था। उसके परिजन महिला को बीआरडी न ले जा कर श्री कृष्णा मिशन हॉस्पिटल ले गये। यहां भर्ती करने के बाद उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गयी थी । मृत्यु के बाद हुई जांच में उसकी रिपोर्ट पाजिटिव आयी थी। उसके दो बेटे भी पॉजिटिव पाये गए थे। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। मरीज की केस हिस्ट्री जानने की कोशिश न करने , लक्षणों के आधार पर संदिग्ध न मानने , सेहत महकमें को सूचित न करने सहित सेनेटाइजेशन , और हॉट स्पॉट घोषित न करने जैसे मामले चर्चा में रहे ।


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