बच्चों को शिक्षा दिलाना सामूहिक जिम्मेदारी : अमित कुमार उपाध्याय


 बाल कल्याण समिति संतकबीरनगर ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया 


  (बृजवासी शुक्ल) संतकबीरनगर (उ.प्र.) । भारत में आदि काल से ही बच्चों को ईश्वर का रूप माना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य इस सोच से काफी भिन्न है। बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। गरीब बच्चे स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने की उम्र में मजदूरी करने के लिए विवश है। यह बहुत ही चिंताजनक है। हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि गरीब शोषित एवं सभी वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्रदान किया जाए और उन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया जाए।



उक्त बातें विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल कल्याण समिति संत कबीर नगर द्वारा आयोजित संगोष्ठी में समिति के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता​करते हुए कहीं । श्री उपाध्याय ने कहा कि विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम की वैश्विक सीमा पर ध्यान केंद्रित करना और बाल श्रम को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रयास करना है। संगोष्ठी का संचालन करते हुए बाल कल्याण समिति संतकबीरनगर के सदस्य सत्यप्रकाश उर्फ टीटू बाबू ने कहा कि आमतौर पर बच्चे अपनी उम्र के अनुरूप कठिन काम जिन कारणों से करते हैं, उनमें आम तौर पर गरीबी और अशिक्षा है। बच्चों को बाल श्रम में धकेलने वाली समस्याओं को दूर कर उन्हें शिक्षित तथा सम्पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए प्रणाली बनाए जाने की जरूरत है।


संगोष्ठी में उप निरीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बच्चों को बेहतर शिक्षा और बेहतर माहौल दिए जाने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं और बाल श्रम नियंत्रण के लिए सभी को संकल्पवान होना पड़ेगा। 



बतौर मुख्य वक्ता विशेष अभियोजन अधिकारी अनिल सिंह ने कहा कि शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है। इसे सभी बच्चों को मिलना ही चाहिए। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का उद्देश्य बताते हुए अनिल सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुमान के मुताबिक छोटे से लेकर बड़े स्तर पर बड़े पैमाने पर बच्चों को जबरदस्ती बाल श्रम में धकेल दिया जाता है। वैश्विक स्तर पर चिंतित होकर आज का दिन बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाए जाने के लिए चुना गया है।  



बाल कल्याण समिति के सदस्य विद्यानंद ने कहा कि बाल श्रम समाज के लिए कलंक के समान है। बच्चों को उनका वाजिब हक मिलना ही चाहिए। कच्ची उम्र में बाल श्रम में ढकेल कर बच्चों का बौद्धिक और शारीरिक विकास बाधित होता है। यदि बच्चों को अच्छा और सकारात्मक माहौल मिले, तो निश्चित तौर पर वह समाज में अपनी भूमिका को अच्छी तरह से निर्वहन करेंगे।


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