श्रमिक नींव की ईंट हैं : जयन्त मिश्र

तारकेश्वर टाईम्स (हि.दै.)


बस्ती  (उ. प्र.) । भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत चेन्नई में 1 मई 1923 में हुई। भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी। यही वह मौका था जब पहली बार लाल रंग झंडा मजदूर दिवस के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया था।  श्रमिक नींव की ईंट हैं । हमें हमेशा इनका सम्मान करना चाहिए ।   



  उक्त बातें उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश सचिव एवं राष्ट्र कौशल टाईम्स के संस्थापक जयन्त कुमार मिश्र ने श्रमिक दिवस के अवसर पर कहीं । उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत भारत में मजदूर आंदोलन के साथ हुई थी । इस आन्दोलन का नेतृत्व वामपंथी व सोशलिस्ट पार्टियां कर रही थीं। दुनियाभर में मजदूर संगठित होकर अपने साथ हो रहे अत्याचारों व शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। 


श्री मिश्र ने कहा कि एक मई को दुनिया के कई देशों में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाता है। इस दिन को लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है। प्रदेश सचिव ने कहा कि ये दिन पूरी तरह श्रमिकों को समर्पित है। इस दिन भारत समेत कई देशों में मजदूरों की उपलब्धियों को और देश के विकास में उनके योगदान को सलाम किया जाता है। 


उन्होंने कहा कि हमें मजदूरों के सम्मान, उनकी एकता और उनके हक का समर्थन और आदर करना चाहिए । इस दिन दुनिया के कई देशों में छुट्टी होती है। इस मौके पर मजदूर संगठनों से जुड़े लोग रैली व सभाओं का आयोजन करते हैं । श्री मिश्र ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत एक मई 1886 को अमेरिका में एक आंदोलन से हुई थी। इस आंदोलन के दौरान अमेरिका में मजदूर काम करने के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किए जाने को लेकर आंदोलन पर चले गए थे। 1 मई, 1886 के दिन मजदूर लोग रोजाना 15-15 घंटे काम कराए जाने और शोषण के खिलाफ पूरे अमेरिका में सड़कों पर उतर आए थे।


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