डेढ़ लाख रुपये या दुल्हन की बात पर अड़े बराती

तारकेश्वर टाईम्स (हि.दै.)


  लातेहार। हेरहंज प्रखंड के नवादा ग्राम निवासी स्व. बनवारी उरांव व हीरामणि कुंवर के तृतीय पुत्र जोगेंद्र उरांव एवं लातेहार के तरवाडीह ग्राम निवासी सीताराम उरांव व शालमुनी देवी की प्रथम सुपुत्री सुषमा कुमारी की शादी के कार्ड में लिखी गई उक्ति 'क्या कुदरत है, नसीबा का कौन किसके करीब होता है। विवाह उसी से होता है, जहां जिसका नसीब होता है' वर और वधू पर शादी से पूर्व ही चरितार्थ हो गई।



तय समय के अनुसार जोगेंद्र बारात लेकर अपनी दुल्हन सुषमा के घर पर 6 मार्च की रात में पहुंचा, लेकिन यहां आने पर पता चला कि उनकी दुल्हन ही गायब हो गई है। रात भर दुल्हन को ढूंढने का सिलसिला चलता रहा। लेकिन, दुल्हन का कोई पता नहीं चल सका, दूसरे दिन शनिवार को सुषमा के पिता भी घर से गायब हो गए। घर में बची सिर्फ सुषमा की छोटी बहन सुषिता और उसकी मां शालमुनी देवी। बारात में आए लोग और स्थानीय ग्रामीणों के बीच काफी देर तक आपसी विचार विमर्श चलता रहा। इसके बाद बराती पक्ष के लोगों ने कहा कि सुषमा की छोटी बहन से ही दूल्हे का विवाह कर उसे विदा कर दिया जाए। लेकिन, इस बात पर भी सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद मामले की सूचना प्रशासन के साथ पुलिस को दी गई।


दूल्हा जोगेंद्र के चाचा विजय उरांव ने जानकारी देते हुए कहा कि हमलोगों ने सर्वसम्मति से विवाह की तिथि निर्धारित की थी। विवाह में किसी प्रकार के दहेज की रकम नहीं ली गई थी, लेकिन बरात लेकर गांव आने पर पता चला कि दुल्हन ही गायब हो गई। हमलोगों ने पूरी रात जागकर इंतजार किया, लेकिन लड़की नहीं आई तो हमने जायज तरीके से कहा कि बरात लेकर आने में अब तक डेढ़ लाख रुपये से अधिक की रकम खर्च हुई है। यह रकम हमलोगों को दे दी जाए या लड़की की छोटी बहन से ही विवाह करा दिया जाए। लेकिन, इस पर भी लड़की के मां-पिता राजी नहीं हैं। सबसे बड़ी बात कि लड़की के पिता सीताराम उरांव अपने घर से ही गायब हो गए हैं।
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