17 साल में अर्श से फर्श पर आ गया यस बैंक

तारकेश्वर टाईम्स (हि.दै.)


नई दिल्ली । निजी क्षेत्र का यस बैंक कभी निवेशकों का सबसे पसंदीदा हुआ करता था और उसके शेयर आसमान छू रहे थे, लेकिन रिजर्व बैंक की ओर से फंसे कर्ज (एनपीए) का खुलासा हर तिमाही करने के नए नियम से यस बैंक की मुश्किलें धीरे-धीरे बढ़ने लगीं और पिछले दो साल में इसके प्रबंधन की पोल खुल गई।



रिजर्व बैंक की पैनी नजर काफी समय से इसपर बनी हुई थी और गुरुवार को उसने नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। यस बैंक को संकट से निकालने के लिए आरबीआई के कदम के बावजूद इसके शेयर शुक्रवार को 70 फीसद से अधिक टूट चुके हैं। यह 52 हफ्ते के अपने सबसे निचले स्तर पर है। 


हालांकि गुरुवार सुबह यह खबर आने के बाद कि एसबीआई यस बैंक में हिस्सेदारी लेगा, उसके शेयर 29 फीसदी तक चढ़ गए। हालांकि, बाद में यस बैंक के शेयर 26.96 फीसदी चढ़कर 36.85 रुपये पर बंद हुए। एसबीआई ने शेयर बाजार को बताया है कि सेबी रेगुलेशन 2015 के तहत रेगुलेशन-30 के मुताबिक, हम एक समयसीमा में यह काम करेंगे और बाजार को इसकी जानकारी देंगे।
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