जिले में सक्रिय फर्जी सर्जन गैंग

तारकेश्वर टाईम्स (हि.दै.)


(एल.पी. चौधरी) सुल्तानपुर (उ.प्र.)। स्टार नर्सिंगहोम के संचालक ने यह तो कुबूल किया कि ऑपरेशन उसके अस्पताल में कुशल चिकित्सकों द्वारा किया गया लेकिन किस डॉ ने किया यह बताने के लिए न तो वह पुलिस के पास आया न विवेचक ही उसे खोजे पा रहे हैं। लेकिन अस्पताल से रुचि पाठक को नर्सिंगहोम लाने वाली दलाल के हसीना बेगम ने ऐसे राज बताये हैं जिससे न केवल चीर फाड़ करने वाले का पता चला बल्कि जिले में नीम हकीमो द्वारा चलाये जा रहे ऑपरेशन के गोरखधंधे का पता चला। जिसे सुनकर आम आदमी तो क्या बड़े बड़े सर्जन भी चौंक जाएंगे।
ओटी असिस्टेंट ने ही कर दिया था ऑपरेशन ?
कुड़वार थाना क्षेत्र के ढाहा फिरोजपुर गांव की हसीना बेगम पर आरोप है कि वह स्टार नर्सिंगहोम के लिए मरीज लाने की दलाली करती है। उसी ने बताया है कि उसके साथ मायंग की राजकुमारी सिंह भी रहती है। रुचि पाठक को वही दोनों जिला अस्पताल से स्टार नर्सिंगहोम ले गयी थी। वैसे तो हसीना अनपढ़ है लेकिन दीन ईमान की बात बहुत करती है।सूत्र बताते है कि इंट्रोगेशन के समय उसने कुबूल किया कि उसे कुछ भी बताने से रोका गया था लेकिन उसने सारी बात सच सच बता दिया। उसी ने बताया कि रुचि पाठक को नर्सिंगहोम ले जाने के बाद आनन फानन में खुर्शीद ने ही चीरफाड़ किया था। हसीना ने तो यहां तक बताया है कि पहले ओटी सहायक का काम करने वाला खुर्शीद अब बेहोशी के इंजेक्शन से लेकर ऑपरेशन तक करता है।
सहायक से बने सर्जन अब चला रहे अस्पताल
स्टार नर्सिंग होम में रुचि पाठक की मौत के बाद चिकित्सा क्षेत्र में चल रहे गोराखधन्धे की पड़ताल में अब जो जानकारी मिली है वो आश्चर्य जनक किंतु सत्य है। डिहवा का खुर्शीद अकेला नही है ऐसा करने वाले कमसे कम चार ऐसे लोग है जो जिले के प्राइवेट अस्पतालों में घूम घूम कर मरीज को बेहोशी का इंजेक्शन देने व ऑपरेशन का रोजगार करते हैं।पहले यह लोग सर्जन के सहायक थे अब धड़ल्ले से अपना अस्पताल चला रहे हैं। इनमें संतोष सिंह वी के शुकला व एच के तिवारी का नाम तो सारे नर्सिंगहोम वाले कि जुबान पर है। इनमें से एक तो जिला अस्पताल में काउंसलर है और शहर लक्ष्मणपुर व राहुल चौराहे के पास निजी अस्पताल भी खोल लिया है। बताया जाता है ये लोग पहले नामी गिरामी सर्जनों के साथ रहते थे फिर ऑपरेशन में मदद करते करते खुद चीरफाड़ करने लगे अवैध कमाई ऐसा चस्का लगा कि एनेस्थिसिया भी देने लगे और लाइसेंस लेकर अब खुले आम ऑपरेशन का धंधा कर रहे हैं। कुछ तो अपने नाम के आगे डॉ भी लिखते है।
चंद रुपये में झटपट करते है चीरफाड़
बताया जाता है मरीजों की संख्या के मुकाबले चिकित्सक न होने के कारण सर्जन ऑन कॉल एक ऑपरेशन का 5000 रुपये लेते है जिसमे एनेस्थेटिक की फीस भी होती है। सरकारी अस्पतालों में सख्ती के कारण ये मिलते भी कम है।लेकिन अपनी कला से कुशल शल्यक बने इस गैंग के सदस्य मात्र ढाई से तीन हजार रुपये ही बेहोशी व ऑपरेशन का लेते हैं इससे नर्सिंगहोम को भी फायदा होता है। फर्जी सर्जन हरदम ऑन काल उपलब्ध रहते है। जबकि सही वाले या तो रात में ही ऑपरेशन करते है या फिर फीस ज्यादा वसूलते है। यही वजह है कि छोटे छोटे अस्पताल नर्सिंगहोम में भी बड़े बड़े ऑपरेशन झटपट व सस्ते में निपटा दिए जाते है।



स्टार नर्सिंग होम में रुचि पाठक का ऑपरेशन करने का जिस खुर्शीद पर आरोप लगा है वह पुलिस को नही मिला लेकिन संवाददाता ने खोज निकाला । उससे टेलीफोनिक वार्ता हुई। वो बोला मैं ओटी सहायक के रूप में एक दो नही सात आठ निजी अस्पतालों में जाता हूँ। चीरफाड़ नही करता। मेरा स्टार नर्सिंग होम व रुचि पाठक केस से कोई वास्ता नही है। ट्रू कॉलर पर डॉ खुर्शीद लिखे होने पर वो बोला डॉ नही हूँ पर गलती से लिख गया है। लोग बताते है कि वह शहर के दरियापुर मुहल्ले में क्लिनिक चलाता था खुर्शीद कहता है नही ।


कागजो में हेरा फेरी तो नही
समय बीतने के साथ स्टार नर्सिंगहोम कांड के मास्टरमाइंड पर तरह तरह की बातें कही जा रही है। कोई कहता है कि जब तक किसी डॉ से सेटिंग नही हो जाती ऑपरेशन करने वाले सर्जन का नाम नही बताएगा। इसके लिए पहले सुरक्षित कुछ बीएचटी(बेड हेड टिकट ) के फार्म में हेरा फेरी की कोशिश की गई लेकिन सूत्र बताते हैं रजिस्टर ऑन कॉल में किसी सर्जन को बुलाने का इंद्राज न होने से सारा खेल फरुक्खाबादी हो गया है। फिलहाल पंजीकृत डॉ काजी सईद व डॉ आरके गुप्ता के बयान के बाद सारा राज खुल जायेगा।
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