गायब हो रहे जनसरोकार के मुददे: जयशंकर गुप्त

जौनपुर। दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त ने कहा है कि वर्तमान समय मेें पत्रकारों की भूमिका को लेकर अनेक प्रकार की बाते चल रही है, उन्हे संदेह के नजरिये से देखा जा रहा है लेकिन वास्तव में ऐसा प्रतीत होता है कि पत्रकारिता ही जीवित है। वे शनिवार को पत्रकार संघ द्वारा आयोजित अपने स्वागत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि सोशल मीडिया पर अविश्वनीय और प्रमाणहीन बातों की अधिकता है और प्रिण्ट मीडिया पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। उन्होने कहा कि एक बेहतरीन लाइन के माध्यम से स्पष्ट किया कि इस वक्त धुंआ देखने कहां जाय अखबार में पढ़ लेगे कल। कहा कि आज के दौर पर सब कुछ नहीं लिखा जा सकता। जनसरोकारों से जुड़े मुददे गायब होते जा रहे है। उन्होने महिलाओं और गरीबी का मार्मिक चित्रण किया जिससे वहां मौजूद श्रोता भाव विभोर हो गये। इसी क्रम में उनके साथ दिल्ली से आये वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन ने कहा कि हर जगह की अपनी चुनौतियां होती है। दिल्ली में पत्रकारिता के क्षेत्र में काम की बेहतर सुविधा है किसी किस्म का दबाव नहीं रहता। जनपदोें में काम करना ज्यादा मुश्किल है। यहां कम सुविधाये और समस्याये अधिक है। यहां पत्रकारिता अधिक मुश्किल है। उन्होने कहा कि यहां पर न्याय पचायत स्तर पर रिपोर्टर होते है और उन्ही के बल पर पत्रकारिता टिकी है। कार्यक्रम में सूचना विभाग के सेवा निवृत्त कर्मचारी मुन्नी लाल का दोनों वरिष्ठ पत्रकार अतिथियों ने अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह प्रदान कर विदायी दी। इसके पूर्व दोनो अतिथियों का पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशि मोहन सिंह क्षेम ने माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार लोलारक दुबे, राम दयाल द्विवेदी, विरेन्द्र सिंह, विरेन्द्र गुप्ता, सुभाष मिश्रा, शशि राज सिन्हा, राज कुमार सिंह, रोजश मौर्य, विरेन्द्र पाण्डेय सहित तमाम पत्रकार व गण्यमान्य लोग मौजूद रहे। संचालन महामंत्री मधुकर तिवारी ने किया।


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