अपराधियों की शरणस्थली बन रहा पूर्वांचल व नेपाल


गोरखपुर । गोरखपुर व आस पास को अभ्यारण्य मानकर बाहर के अपराधी अपनी शरण स्थली बना रहे हैं । फिरोजाबाद पुलिस के लिए वांछित चल रहे 50 हजार के इनामी बदमाश देवेंद्र यादव ने छह माह से महराजगंज जिले में शरण ले रखी थी। हत्या के प्रयास में सात साल और हत्या के मामले में आजीवन कारावास का सजायाफ्ता फिरोजाबाद जिले का रहने वाला देवेंद्र ने अपने ही गांव के एक व्यक्ति की 28 अगस्त 2019 को हत्या करने के बाद से ही यहां शरण ले रखी थी। एसटीएफ की गोरखपुर फिल्ड यूनिट ने मंगलवार की रात स्टेशन रोड से मुठभेड़ में उसे गिरफ्तार किया।




 


 



केस - दो : बस्ती में सोमवार को एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में ढेर शातिर बदमाश फिरोज पठान ने सिद्धार्थनगर जिले के बांसी उपनगर में अपना ठिकाना बना रखा था। मूल रूप से वह इलाहाबाद का रहने वाला था। बाद में मध्यप्रदेश के जबलपुर में घर बनवाकर परिवार के साथ रहने लगा। बांसी को ठिकाना बनाकर बैंक लूट करने वाले गिरोह का संचालन करता था। बस्ती और महराजगंज जिले में हुई लूट की घटना का पर्दाफाश करने के लिए लगाई गई एसटीएफ ने उसे मार गिराया।


 




 



केस - तीन : पिछले साल अगस्त में एसटीएफ ने शाहपुर क्षेत्र के रेलवे बौलिया कालोनी में ठिकाना बनाकर रह रहे छपार, बिहार के 50 हजार के इनामी बदमाश महेश राय को तथा कैंट क्षेत्र में रह रहे सीतामढ़ी, बिहार के 50 हजार के इनामी बदमाश राकेश और उसके साथी को गिरफ्तार किया था। महेश राय, बिहार के एक सांसद को गोली मारने और राकेश तथा उसका साथी हत्या व लूट के कई मामलों में विहार पुलिस के लिए वांछित चल रहे थे। उनके पकड़े जाने के बाद पता चला कि बिहार में संगीन वारदातों को अंजाम देने के बाद वे गोरखपुर चले आते थे।


 


यह तीनों उदाहरण इस बात की गवाही देने के लिए काफी हैं कि बिहार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदमाश, पुलिस से बचने के लिए बस्ती और गोरखपुर मंडल के जिलों में शरण ले रहे हैं। बताते है कि नेपाल सीमा से करीब होने की वजह से बदमाश, दोनों मंडलों के जिलों को सुरक्षित ठिकाना मानने लगे हैं। क्योंकि गिरफ्तारी के लिए पुलिस के दबाव बनाने पर ये बदमाश आसानी से नेपाल भागकर गिरफ्त में आने से बच निकलते हैं।



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