अनिल कुमार दमेले पर भी होगी एफआईआर, 700 करोड़ घोटाला मामला

तारकेश्वर टाईम्स (हि.दै.)


 लखनऊ । पंचायती राज विभाग में हुए करीब 700 करोड़ रुपये के परफार्मेंस ग्रांट घोटाले में तत्कालीन निदेशक रिटायर आईएएस डॉ़ अनिल कुमार दमेले को भी आरोपित बनाया जाएगा। सरकार ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मंजूरी दे दी है। 22 नवंबर 2019 को लखनऊ के अलीगंज थाने में विजिलेंस द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर में उनका नाम भी बढ़ाया जाएगा। विजिलेंस ने तत्कालीन निदेशक विजय किरण आनंद के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की थी। लेकिन सरकार ने उनके संबंध में अभी कोई फैसला नहीं लिया है।



भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के बाद परफार्मेंस घोटाले की विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे। सरकार को पता चला था कि 31 जिलों की 1,798 ग्राम पंचायतों में से 1,123 में अनियमित रूप से परफार्मेंस ग्रांट की धनराशि जारी कर दी गई थी। खुली जांच में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ तमाम साक्ष्य मिलने के बाद विजिलेंस की तरफ से अलीगंज थाने में तत्कालीन अपर निदेशक राजेंद्र सिंह, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी केशव सिंह, अपर निदेशक एसके पटेल, उप निदेशक, गिरीश चंद्र रजक के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। इसके अलावा 12 जिलों के पंचायती राज अधिकारियों, सहायक विकास अधिकारियों, सम्बन्धित ग्राम पंचायत अधिकारियों व सचिवों के विरूद्ध भी अलग-अलग जिलों में एफआईआर कराई गई थीं। तत्कालीन पंचायती राज निदेशक अनिल कुमार दमेले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का मामला सीएम के यहां लंबित था। सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय ने उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मंजूरी दे दी है। जानकारी के मुताबिक निदेशक पंचायतीराज के पद पर रहते हुए अनिल कुमार दमेले ने केंद्र सरकार की गाइडलाइन व शासनादेशों की अनदेखी कर अपात्र ग्राम पंचायतों को परफॉर्मेंस ग्रांट जारी कर दिया। जल्द ही उनका नाम एफआईआर में बढ़ाया जाएगा।


आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ़ नूतन ठाकुर ने आरोप लगाया कि परफार्मेंस ग्रांट घोटाले में सरकार बड़े अफसरों को बचा रही है। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर इस घोटाले में शामिल तत्कालीन पंचायती राज निदेशक विजय किरण आनंद को बचाए जाने का आरोप लगाया है। पत्र में उन्होंने अनिल कुमार दमेले को भी बचाने के आरोप लगाए थे। उनका पत्र सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद सीएम आफिस ने ट्वीट कर अनिल कुमार दमेले के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी।


सीएम को भेजे गए पत्र में डॉ. ठाकुर ने एसपी विजिलेंस के उस पत्र का भी जिक्र किया है, जिसमें विजिलेंस ने उक्त दोनों अफसरों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करवाने की संस्तुति की थी। पत्र के मुताबिक पंचायती राज विभाग के पूर्व निदेशक अनिल कुमार दमेले और तत्कालीन निदेशक विजय किरण आनंद सहित कई अधिकारियों के खिलाफ अमानत में खयानत, साजिश रचने के सहित 13(1)(डी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की थी। आरोप लगाया कि विजिलेंस की संस्तुति को नजरअंदाज कर शासन ने केवल उपनिदेशक गिरीश चन्द्र रजक, अपर निदेशक राजेंद्र सिंह, शिव कुमार पटेल और मुख्य वित्त अधिकारी केशव सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की अनुमति दी। इसके आधार पर सतर्कता अधिष्ठान ने 22 नवम्बर 2019 को उक्त छोटे अफसरों के खिलाफ ही लखनऊ के अलीगंज थाने पर एफआईआर दर्ज करवाई।
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