पब्लिक डिसेंसी में 120 गिरफ्तार

तारकेश्वर टाईम्स  (हि0दै0)


नई दिल्ली । 29 दिसंबर को हफ़्ता ख़त्म हुआ । पिछले एक सप्ताह के दौरान सऊदी अरब में जो गिरफ़्तारियां हुईं, उनमें से 120 पर 'पब्लिक डिसेंसी' के उल्लंघन का इल्ज़ाम है । मतलब, इनपर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर शऊर नहीं दिखाया । अदब के कपड़े नहीं पहने । नरमी की ख़बरों के बाद पहली दफ़ा इस तरह की कार्रवाई हुई है । 



( ये 20 दिसंबर, 2019 की तस्वीर है । सऊदी में तीन दिन का एक बड़ा म्यूज़िक फेस्टिवल हुआ। इसमें पुरुष और महिला, दोनों हिस्सा ले सकते थे । ये इवेंट सऊदी की तरफ से एक बड़ी कोशिश थी , ये दिखाने के लिए कि उनके यहां बदलाव आ रहे हैं । पाबंदियां कम हो रही हैं । इस इवेंट के बाद कई महिलाओं ने सोशल मीडिया पर हरेसमेंट की शिकायत की । इन आरोपों में कई लोग अरेस्ट भी किए गए हैं )


सऊदी में ताज़ के अगले वारिस हैं प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान अल सऊद. अभी उनके पिता किंग सलमान भले गद्दी पर हों, मगर सत्ता प्रिंस सलमान के ही हाथ में मानी जाती है । प्रिंस सलमान के आने के बाद से सऊदी ने अपने तौर-तरीकों में थोड़ा बदलाव किया । नियमों में बहुत तो नहीं, मगर थोड़ा लचीलापन आया । जैसे- महिलाओं को ड्राइविंग की इजाज़त देना । सिनेमा पर लगा बैन ख़त्म करना । ऐसे कॉन्सर्ट्स को हरी झंडी, जहां महिला और पुरुष दोनों शामिल हो सकें । धार्मिक पर्यटन और बिज़नस से इतर 49 देशों के पर्यटकों के लिए सऊदी के दरवाज़े खोलना (जिन 49 देशों के लोग सऊदी का टूरिस्ट वीज़ा हासिल कर सकते हैं, उनमें चीन तो शामिल है, लेकिन भारत नहीं है. एशिया के सात देशों को इस लिस्ट में रखा गया है- ब्रूनेई, चीन, जापान, कज़ाकस्तान, मलयेशिया, सिंगापोर और दक्षिण कोरिया) ।


ये छोटे-मोटे बदलाव काफी प्रचारित किए गए । कहा जाने लगा कि सऊदी की नई लीडरशिप उसे थोड़ा उदार बनाने की राह पर है. ख़बरों के मुताबिक, सामाजिक नियम-क़ायदों में छूट दिए जाने की शुरुआत के बाद ये पहली दफ़ा 'डिसेंसी' जैसे आरोपों में इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है ।
              किस तरह की 'डिसेंसी' ?
सऊदी की कुल आबादी में करीब दो-तिहाई लोग 30 साल से कम हैं । माना जाता है कि ये धड़ा अपने यहां हो रहे बदलावों से खुश है । मगर 'लचीलेपन' की इन उम्मीदों के बीच सितंबर 2019 में सऊदी ने कहा, 'पब्लिक डिसेंसी' से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर सज़ा मिलेगी । जुर्माना भरना होगा । इनके अंतर्गत - महिलाओं और पुरुषों को 'सही तरह से' कपड़े पहनने होंगे । सार्वजनिक जगहों पर प्यार जताने, एक-दूसरे के करीब आने पर पाबंदी होगी । सार्वजनिक जगहों पर आई महिलाओं के कंधे और घुटने कपड़े से ढके होने चाहिए । अधार्मिक और अशुद्ध भाषा, इस तरह के हाव-भाव से बचना होगा ।
          चुस्त कपड़े नहीं पहन सकेंगे 


बाहर से आने वालों को ये नियम मालूम हों, इसके लिए तैयारियां भी की गईं । विजिटसऊदी.कॉम पर कई तरह की ड्रॉइंग दिखी । इनमें बताया गया कि कैसे कपड़े पहन सकते हैं, कैसे नहीं पहन सकते । बाकी इधर-उधर कूड़ा फेंकने, थूकने, लाइन तोड़ने, लोगों की इजाज़त बिना उनकी तस्वीर खींचने या विडियो बनाने और नमाज के समय संगीत बजाने जैसी चीजें भी प्रतिबंधित रखी गईं । सऊदी में शराब की ख़रीद-बिक्री पर बैन है । आप पी भी नहीं सकते हैं । न ही कहीं बाहर से शराब ला सकते हैं अपने साथ ।


सऊदी तेल की इकॉनमी पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है । इसके लिए एक रास्ता पर्यटन भी है - लक्ज़री टूरिज़्म ।सऊदी का लक्ष्य है 2030 तक टूरिज़म को बढ़ाकर अपनी जीडीपी 10 फीसद तक ले जाना । अभी ये तीन प्रतिशत है । शराब जैसी चीजें तो फिर भी स्पष्ट हैं । मगर 'पब्लिक डिसेंसी' का दायरा काफी अनिश्चित है । ऐसे में कई बार सहज समझी जाने वाली चीजें भी अभद्र ठहरा दी जाती हैं । आरोप है कि कई मामलों में ये पुलिस की मर्ज़ी पर तय होता है कि वो किसे 'डिसेंट' नहीं मान रहे हैं ।
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