सीएए और एनआरसी से किसी को नहीं होगी कोई परेशानी : गृह मंत्रालय

तारकेश्वर टाईम्स  (हि0दै0)


        नागरिकता संशोधन कानून ( सीएए ) और एनआरसी को लेकर फैल रही अफवाहों और आशंकाओं के बीच गृहमंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि किसी को भी नागरिकता साबित करने के लिए कोई परेशानी नहीं होगी । गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि एनआरसी के दौरान भी किसी को अपने पिता या दादा का 1971 के पहले के जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज देने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा । गरीब व अशिक्षित लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए स्थानीय गवाह और समुदाय की ओर से दिये गए सबूतों को भी स्वीकार किया जाएगा ।



  आसान प्रमाण और पड़ोसी की गवाही भी मान्य 


    सीएए और एनसीआर को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलायी जा रही हैं । लोगों को यह कहकर उकसाया जा रहा है कि एनसीआर लागू होने के बाद उन्हें 1971 के पहले के अपने पिता या दादा का जन्म-प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज देने के लिए कहा जाएगा और दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में उन्हें देश छोड़ना होगा । गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये पूरी तरह गलत है । उन्होंने कहा कि अभी एनसीआर के नियम ही नहीं बने हैं । लेकिन यह साफ है कि इसके लिए दस्तावेज देने के नियम कड़े नहीं होंगे , बल्कि कई प्रकार के दस्तावेजों में किसी एक के होने पर भी उन्हें नागरिक माना जाएगा । यहां तक कि अशिक्षित और गरीब लोगों के लिए समुदाय की ओर से दिये सबूत या पड़ोसी की गवाही को मान्य किया जाएगा ।


       जनता को जागरुकता कर रही सरकार 


 सरकार द्वारा विज्ञापन के जरिए लोगों को  जागरुक किया जा रहा है । इसमें कहा गया है - 'अपना स्वार्थ साधने वालों के बहकावे में न आकर खुद पढ़ें , समझें और फिर इस मामले में विवेक से अपनी समझ बनाएं ।' लगभग एक दर्जन सवाल जवाब में सबसे पहले यही बताया गया है कि नागरिकता कानून और एनआरसी अलग- अलग है ।



नागरिकता कानून संसद की मंजूरी के बाद लागू हो चुका है , जबकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद एनआरसी असम में लागू किया गया है । पूरे देश के लिए एनआरसी की घोषणा अभी नहीं हुई है । इसके लिए नियम प्रक्रिया तय होने बाकी हैं। कई सवाल है , जैसे - क्या एनआरसी से भारतीय मुसलमानों को परेशान होने की जरूरत है ? क्या इसे धार्मिक आधार पर लागू किया जाएगा ? क्या ऐसे सबूत मांगे जाएंगे जिसे जुटाना मुश्किल होगा ? अगर कोई दस्तावेज न हो तो नागरिकता कैसे प्रमाणित की जाएगी आदि ।



इसमें बताया गया है कि इसका धर्म से कोई लेना- देना नहीं है और यह एक रजिस्टर जैसा होगा जिसमें हर किसी को नाम दर्ज कराना होगा । आधार का उदाहरण देते हुए बताया गया कि जैसे उसमें रजिस्टर के लिए नाम पता, जन्मतिथि आदि के कुछ प्रमाण देने होते हैं, एनआरसी भी वैसी ही प्रक्रिया होगी । इसके लिए माता - पिता से जुड़े दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी ।


      गवाही से भी आसान होगी पहचान 


 यह भी बताया गया है कि अगर किसी के पास कोई दस्तावेज नहीं हुआ तो गवाह की भी इजाजत दी जा सकती है । कम्यूनिटी वेरिफिकेशन का भी प्रावधान किया जाएगा ताकि किसी को कोई परेशानी नहीं हो । हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि हर व्यक्ति को किसी न किसी तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है । उनके पास वोटर कार्ड हैं । ऐसा कोई भी पहचान काफी होगा। इसी संदर्भ में यह भी बताया गया है कि असम में हुई परेशानी और 19 लाख लोगों के बाहर होने को उदाहरण न मानें । असम घुसपैठ से प्रभावित राज्य रहा है । वहां छह साल तक आंदोलन चला और फिर राजीव गांधी के काल में एक समझौता हुआ जिसके आधार पर 1971 को कटआफ डेट मानकर नागरिकता तय करने की बात हुई थी । उसे पूरे देश के लिए उदाहरण मानकर घबराने की जरूरत नहीं है ।



पूरे देश में लागू नागरिकता कानून के अनुसार 1987 के पहले भारत में जन्मे सभी लोग यहां के नागरिक हैं । यही नहीं , जिन लोगों के माता-पिता का जन्म भारत में 1987 के पहले हुआ है , वे भी स्वाभाविक नागरिक माने जाएंगे । इसके साथ ही 2004 के पहले जन्में लोगों में यदि किसी के माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हुआ , तो वे भी देश के स्वाभाविक नागरिक हैं । जाहिर है सीएए और एनसीआर से देश के किसी नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है ।


        नागरिकता का रास्ता है सीएए 


सीएए यानि नागरिकता संशोधन कानून 2019 , देश के बाहर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए भारतीय नागरिकता देने का रास्ता खोलता है । इन तीनों पड़ोसी देशों से उत्पीड़ित या किसी और कारण से अपना देश छोड़कर भारत में आना चाहते हैं ।



         सीएए  में कौन शामिल हैं ?


नागरिकता संशोधन अधिनियम  ( सीएए ) में छह गैर-मुस्लिम समुदायों - हिंदू , सिख , ईसाई , जैन , बौद्ध और पारसी से संबंधित अल्पसंख्यक शामिल हैं । इन्हें भारतीय नागरिकता तब मिलेगी , जब वे 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर गए हों । इस संशोधन विधेयक के आने से पहले तक भारतीय नागरिकता के पात्र होने के लिए भारत में 11 साल तक रहना अनिवार्य था । नए बिल में इस सीमा को घटाकर छह साल किया गया है ।


     राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर ( एनआरसी )


एनआरसी (NRC) नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है, जो भारत से अवैध घुसपैठियों को निकालने की एक प्रक्रिया है । सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनआरसी प्रक्रिया हाल में असम में पूरी हुई ।


 असम के लिए एनआरसी नागरिकता का मापदंड 


असम में लागू की गई एनआरसी के तहत ऐसा व्यक्ति भारत का नागरिक होने के योग्य है , यदि वे साबित करते हैं कि या तो वे या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 को या उससे पहले भारत में थे । असम में इसे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर करने के लिए शुरू किया गया था , जो भारत आए थे । बता दें कि 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ था ।


               ( आमोद उपाध्याय - सम्पादक )
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