महाराष्ट्र : उद्धव व सोनिया नहीं थे राजी , हमने मनाया , सरकार भी बनाई

 मोदी ने सुप्रिया को मंत्री बनाने का दिया था प्रस्ताव , कहा था साथ आइये आनन्द आएगा पर हमने कहा ना : शरद पवार 



     नई दिल्ली । महाराष्ट्र में उद्धव सरकार बनने के बाद शरद पवार पहली बार मीडिया में खुलकर सामने आए हैं । उन्होंने कहा कि सोनिया और उद्धव भी राजी नहीं थे , जिन्हें उन्होंने किसी तरह मनाया । संसद में मोदी और पवार बीस नवम्बर 2019 को मिले थे , जिसके 11 दिन बाद शरद पवार ने कहा कि मोदी ने बेटी सुप्रिया सुले को मंत्री बनाने की बात कही थी , जिसे हमने इन्कार कर दिया था ।


महाराष्ट्र में शिवसेना , एनसीपी  और कांग्रेस के गठबंधन महाविकास अघाड़ी की सरकार गठन के बाद एक टीवी चैनल के साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि सरकार गठन पर मचे घमासान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने साथ आने का ऑफर दिया था । पवार के मुताबिक, मोदी ने उनसे कहा था कि साथ आइए आनंद आएगा । यही नहीं, पीएम ने कहा था कि वह केंद्रीय कैबिनेट में एनसीपी चीफ की बेटी सुप्रिया सुले को मंत्री पद देंगे , मगर पवार ने उनकी इस पेशकश को ठुकराते हुए कहा था कि अभी भारतीय जनता पार्टी के साथ उनका आना संभव नहीं है ।



 उन्होंने यह दावा भी किया कि सोनिया गांधी गठबंधन के लिए राजी नहीं थीं । न ही भाजपा के पूर्व सहयोगी शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के लिए राजी थे , पर इन दोनों को खुद उन्होंने ही मनाया । शरद पवार ने  कहा कि सोनिया गांधी शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं थी । साथ ही उद्धव भी सीएम बनने के लिए तैयार नहीं थे । ऐसे में उनके सामने दोनों नेताओं को मनाने की बड़ी चुनौती थी , जिसे वे निभा ले गये ।


शरद पवार ने कहा कि हमारे बीजेपी के साथ पहले भी अच्छे रिश्ते थे और आगे भी रहेंगे क्योंकि जब तक वो देश के हित की बात करेंगे तो राजनीति में उसका विरोध करने की कोई जरूरत नहीं है । जहां तक राजनीतिक मुद्दों पर जो असहमति रहती है वो तो रहेगी, इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा। ज्ञातव्य है कि महाराष्ट्र में कई हफ्तों तक चली सियासी उठापटक के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी , कांग्रेस और शिवसेना सरकार बनाने में सफल रही है ।



महाराष्ट्र चुनाव में इस बार शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को बहुमत मिला था , लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों पार्टियों में ठन गई थी । बीजेपी ने 105 और शिवसेना ने 56 सीटों पर जीत दर्ज की थी । इसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस - एनसीपी गठबंधन से समर्थन मांगा । तीनों दलों के बीच करीब एक महीने से चल ही रही सियासी मंत्रणा के बीच 23 अक्टूबर को आला सुबह देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सभी को चौंका दिया था । अजित पवार के इस नाटकीय क्रियाकलाप के बाद शरद पवार ने उन्हें विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया । 


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