लखनऊ हिंसा में कश्मीर - बंगाल के लोग

    तारकेश्वर टाईम्स  ( हि0दै0 )


लखनऊ । उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून पर हुई हिंसा के बाद जिंदगी फिर से धीरे−धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है , लेकिन अपने पीछे कई सवाल भी छोड़ गई है ।  जिसका जवाब कुछ दिनों तक सड़क पर तांडव मचाने वाले लोगों और उनके परिवार के सदस्यों को देना होगा तथा उस समाज को भी चिन्हित करना होगा , जिस समाज के दंगाई सड़क पर सरकारी और निजी संपत्तियों में आगजनी के साथ − साथ हाथ में पत्थर लिए मरने − मारने पर उतारू थे ।



पुलिस को जिस तरह दंगाइयों ने अपना निशाना बनाया। वह सुनियोजित था। लखनऊ की बात की जाए तो यहां हिंसा का बंगाल और कश्मीरी कनेक्शन भी दिखाई दिया। राज्य के बाहर से आए युवा जिनके शरीर से लेकर पैरों तक में ब्रांडेड कपड़े और जूते नजर आ रहे थे, उनकी भी शिनाख्त शुरू हो गई है। तलाश उन लोगों की भी हो रही है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर दूसरे राज्यों से आए दंगाइयों को ठहराने−खाने की व्यवस्था की। योगी सरकार जिस तरह से दंगाइयों पर शिकंजा कस रही है, उससे तो यही लगता है कि दंगाइयों को गिरफ्तार किया जाएगा, कुछ पर रासुका के तहत कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा दंगाइयों की संपत्ति जब्त करके जानमाल का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाएगी। इसको लेकर पुलिस काफी आगे बढ़ भी चुकी है ।


उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओम प्रकाश सिंह ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ हाल की हिंसा के सिलसिले में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच के निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी सूरत में निर्दोष लोगों पर जुल्म न किया जाए । डीजीपी ने राज्य के सभी जोनल और जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश देते हुए कहा कि सीएए के खिलाफ प्रदेश के विभिन्न जिलों में हाल में हुई हिंसा के मामले में दर्ज मामलों की निष्पक्ष और गुणवत्तापरक जांच की जाए। किसी भी दशा में निर्दोष व्यक्ति का उत्पीड़न ना किया जाय ।
     उन्होंने कहा कि हर जिले में अपर पुलिस अधीक्षक अपराध या अन्य अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में कुशल जांचकर्ताओं के माध्यम से तफ्तीश की जाय । सुबूत इकट्ठा करके उपद्रवियों की गिरफ्तारी एवं षडयंत्रकारियों के विरूद्ध प्रभावी ढंग से कार्रवाई हो । इसकी जिम्मेदारी जिला तथा परिक्षेत्रीय पुलिस प्रमुखों की होगी । इस बीच , राज्य पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सीएए के खिलाफ हाल में हुई हिंसा के बाद अब पूरे राज्य में शांति कायम है । पुलिस का दावा है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर एक भी गोली नहीं चलायी । उसका कहना है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुए हिंसक प्रदर्शनों की पड़ताल के दौरान वारदातस्थलों से 700 से ज्यादा प्रतिबंधित बोर के कारतूस के खोल बरामद किये गये हैं। ये गोलियां प्रदर्शनकारियों ने चलायी थीं । इसी बीच , एक वायरल वीडियो में एक दारोगा को फायरिंग की आवाज के बीच अपनी पिस्टल में गोलियां भरते दिखाया गया है । करीब डेढ़ मिनट के उस वीडियो में हेलमेट पहने और चेस्ट गार्ड लगाये वह दारोगा अपनी पिस्टल लोड कर रहा है । वह वीडियो कानपुर के यतीमखाना इलाके का बताया जाता है । हालांकि कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल समेत तमाम वरिष्ठ पुलिस अफसर दावा कर रहे हैं कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिये गोलियां नहीं चलायीं । उन्होंने बताया कि प्रदेश में सीएए के विरोध में दिनांक पिछली 10 दिसम्बर से अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में गैरकानूनी प्रदर्शनों, आगजनी, तोड़फोड़ एवं पुलिस पर फायरिंग आदि की घटनाओं में कुल 213 मुकदमे दर्ज किये गये हैं । इन मामलों में 925 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है और 5558 लोगों को हिरासत में लेकर निरोधात्मक कार्यवाही की गयी । इसके अलावा प्रदेश भर में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों ट्विटर , व्हाट्एप , फेसबुक, इन्स्टाग्राम, यूट्यूब आदि पर पोस्ट किये गये आपत्तिजनक / भ्रामक पोस्टों / संदेश / वीडियो वगैरह के मामलों में प्रदेश में अब तक कुल 81 मुकदमे दर्ज कर 120 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। कुल 16,761 सोशल मीडिया पोस्टों के विरूद्ध कार्यवाही की गयी , जिसमें 7,513 ट्विटर पोस्टों, 9,076 फेसबुक तथा 172 यूट्यूब पोस्ट शामिल हैं । प्रदेश में हुई हिंसा के मामले में सुबूत जुटाने और उपद्रवियों की गिरफ्तारी एवं षडयंत्रकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की प्रक्रिया चल रही है । पूरे प्रदेश में स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। गौरतलब है कि संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ गत गुरुवार से शनिवार के बीच प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत करीब 20 जिलों में पुलिस और भीड़ के बीच जबर्दस्त संघर्ष हुआ था। इनमें कम से कम 17 लोग मारे गये थे तथा सैकड़ों अन्य गम्भीर रूप से जख्मी हुए थे ।


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