भाजपा को लाली पाउडर तो शिवसेना को बड़े बिरयानी का शौक

तारकेश्वर टाईम्स  (हि0दै0)



 मुम्बई । शिवसेना से जुदाई के बाद भाजपा मिलन की आस लगाए बैठी रही और शिवसेना के हर कड़वे बोल को सहन करती रही , लेकिन अब सहन करने के मूड में बिल्कुल नही है । शनिवार को शिवसेना के लाली और पावडर वाले बयान पर भाजपा ने भी तीखा जवाब दिया । शिवसेना ने जैसे ही भाजपा की तुलना लाली - पावडर वाली वैश्या से की तो भाजपा ने भी तुरंत शिवसेना को नए रंग में रंगकर इटालियन पिज्जा और बड़े की बिरयानी का शौकीन बता दिया । दोनों दलों के तीखे नोंकझोक से साफ है कि आगामी दिनों में दोनों के बीच जम कर जंग निश्चित है ।



भाजपा के वरिष्ठ नेता आशीष शेलार ने शिवसेना नेता संजय राउत के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि पत्रपण्डित ( संपादक ) अब बदल गए है , नए विचारों की लाली और पावडर में सज कर बड़े की बिरयानी और इटालियन पिज्जा खा कर सरकार की हकीकत बयान कर रहे हैं । शिवसेना का लाली पाउडर वाला बयान शनिवार 21 दिसम्बर 2019 को आया था ।



शेलार ने अपने ट्वीट में लिखा है कि भाजपा के साथ शिवसेना के तीस वर्ष के रिश्ते को ये पत्रपण्डित बोझ बता रहे हैं , अब जो नए रिश्ते बने हैं , जो दो नए लोग साथ आये हैं, वे क्या बोझ ढोने वाले गधे हैं । राउत से सवाल करते हुए शेलार ने अगली लाइन में लिखा है कि बोझ उतरा है , लेकिन कौन किसके नजर से गिरा है यह भी एक सवाल है , इसका जवाब भी उन्हें देना चाहिए ।



राउत ने शिवसेना के मुखपत्र दैनिक सामना के माध्यम से भाजपा को कहा था कि लाली और पावडर लगाकर दरवाजे खोलकर जो बैठी हैं , समय समय पर खिड़कियों से आवाज देकर बुला रही हैं , उन्हें अब अपने दरवाजे और खिड़कियां दोनों बंद कर लेना चाहिए । शिवसेना ने भाजपा नामक बोझ को सिर से उतार कर फेंक दिया है । इस लिए अब उसे किसी के इंतजार की आस नही रहनी चाहिए । लाली और पावडर लगाकर , खिड़की पर बैठकर लोगों को आकर्षित करने और आवाज देकर बुलाने का काम अब बंद करे ।
राउत ने लिखा कि भाजपा ने शिवसेना पर जनता के आदेश का अनादर करने का जो आरोप लगाया था , मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उसका जवाब विधानसभा में ही दे दिया है कि शिवसेना अब भाजपा की पालकी नही उठाएगी ।



विधानसभा चुनाव के बाद युति टूटने से भाजपा और शिवसेना में अब तक तनाव बरकरार है । शिवसेना ने जहां कांग्रेस व एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी सरकार बनाया है , तो वहीं मजबूर होकर भाजपा विपक्ष में बैठ गई है । जबकि विधानसभा चुनाव परिणाम में भाजपा शिवसेना के गठबन्धन को स्पष्ट बहुमत मिला था , लेकिन दोनों के बीच मुख्यमंत्री पद की लड़ाई ने अलग कर दिया ।
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