यूपी सरकार मंदिर प्रबन्धन पर कानून लाएगी या नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने पूछा 

कोर्ट ने राज्य सरकार को छ: हफ्ते में बताने को कहा है कि मन्दिर प्रबन्धन कानून लाने जा रही है या नहीं 
                 ( प्रशान्त द्विवेदी )
नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से फिर नाराजगी जताई है और पूछा है कि क्या राज्य सरकार नियम कानून की अनदेखी कर कार्यकारी आदेश से कुछ भी कर सकती है । कोर्ट ने राज्य सरकार से छ: हफ्ते में बताने को कहा कि मन्दिर प्रबन्धन कानून लाने जा रही है या नहीं । 



   सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एन वी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खण्डपीठ ने मंगलवार को 22 अक्तूबर 2019 को यह टिप्पणी बुलंदशहर के करीब तीन सौ साल पुराने श्री सर्व मंगलादेवी बेला भवानी मन्दिर प्रबन्धन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की । पिछली सुनवाई पर पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह बताने को कहा था कि मन्दिर प्रबन्धन पर क्या कानून है ? 
मंगलवार को सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने बताया कि राज्य में ऐसा कानून नहीं है । इस पर पीठ ने कहा कि अधिकतर राज्यों में कानून है । इस सम्बन्ध में मौजूदा केन्द्रीय कानून क्यों नहीं अपनाया ? क्या उत्तर प्रदेश में कोई भी मन्दिर बना सकता है और कोई भी पैसे जमा कर सकता है । इसके जवाब में एडवोकेट रंजीत कुमार ने कहा कि उन्हें उचित निर्देश लाने के लिए समय दिया जाय । पीठ ने कहा हम इस मामले की बात नहीं कर रहे , हमारा ध्येय बड़ा है । हम निजी मामले की बात नहीं कर रहे बल्कि आम लोगों की बात कर रहे हैं । 



मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी कोर्ट में मौजूद रहे । सत्रह अक्टूबर की सुनवाई में यूपी सरकार की ओर से पेश वकील के पास सम्बन्धित अथाॅरिटी से कोई निर्देश न होने पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई थी । कोर्ट ने कहा था हम तंग आ चुके हैं । चाहे दीवानी मामला हो या आपराधिक  । नाराज कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को तलब किया था ।
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