कश्मीर दौरे पर EU सांसदों का बयान- 370 आंतरिक मसला, आतंक के खिलाफ हम साथ

                  ( कृष्ण कुमार उपाध्याय )
श्रीनगर ।
जम्मू-कश्मीर दौरे पर आए यूरोपीय सांसदों के दल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. डेलिगेशन की ओर से कहा गया कि भारत एक शांतिप्रिय देश है और कश्मीर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं ।


जम्मू-कश्मीर गए 23 EU सांसदों की प्रेस कॉन्फ्रेंसEU सांसदों ने दौरे को छोटा और सफल बताया । ओवैसी के बयान पर EU सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर दौरे पर आए यूरोपीय सांसदों के दल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की । डेलिगेशन की ओर से कहा गया कि भारत एक शांतिप्रिय देश है और कश्मीर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं । प्रेस कॉन्फ्रेंस में EU सांसदों ने कहा कि हमारे दौरे को राजनीतिक नज़र से देखा गया, जो बिल्कुल ठीक नहीं है । हम सिर्फ यहां पर हालात की जानकारी लेने आए थे । अनुच्छेद 370 को इन सांसदों ने भारत का आंतरिक मसला बताया और कहा कि भारत-पाकिस्तान को आपस में बात करनी चाहिए ।



प्रेस कॉन्फ्रेंस में EU सांसदों की ओर से कहा गया कि हम लोग नाज़ी लवर्स नहीं हैं, अगर हम होते तो हमें कभी चुना नहीं जाता । उन्होंने इस शब्द के प्रयोग पर काफी आपत्ति भी जताई । बता दें कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने EU सांसदों की तुलना नाज़ी लवर्स से की थी और उनपर निशाना साधा था ।



सांसदों ने आतंकवाद के मसले पर कहा कि हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ हैं, आतंकवाद का मसला यूरोप के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है । जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या वह इस दौरे की रिपोर्ट यूरोपीय संसद में जमा करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं करेंगे ।


अनुच्छेद 370 के बारे में उन्होंने कहा कि ये भारत का आंतरिक मसला है, अगर भारत-पाकिस्तान को शांति स्थापित करनी है तो दोनों देशों को आपस में बात करनी होगी. अपने घाटी के दौरे के बारे में EU सांसदों ने कहा कि हमें वहां रहने का ज्यादा वक्त नहीं मिला, हम अधिक लोगों से नहीं मिला था । हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि वहां ना जाने से बेहतर थोड़े समय के लिए जाना ही रहा ।



कांग्रेस ने फिर साधा निशाना


यूरोपीय सांसदों के इस दौरे पर कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद को भी वहां नहीं जाने दिया गया था, ना ही राहुल गांधी को इजाजत दी गई. EU सांसदों पर उन्होंने कहा कि एक एनजीओ का इस तरह PMO तक पहुंचना हैरान करता है. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने इस मसले को अंतरराष्ट्रीय बना दिया है ।


गौरतलब है कि मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में यूरोपीय संसद के 23 सांसद श्रीनगर पहुंचे थे. यहां पर इन सांसदों ने स्थानीय नेताओं, अधिकारियों, सरपंचों से मुलाकात की थी । इसके अलावा सभी सांसद श्रीनगर की मशहूर डल झील भी गए थे. कश्मीर घाटी के हालात पर इन सांसदों को भारतीय सेना ने प्रेजेंटेशन भी दी थी ।



श्रीनगर जाने से पहले इन सांसदों के दल ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल के साथ मुलाकात की थी । इस मुलाकात में भी जम्मू-कश्मीर के हालात पर विस्तार से चर्चा हुई थी ।


EU सांसदों के इस दौरे पर भारत में राजनीतिक हलचल तेज हुई थी और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस दौरे का विरोध किया था । दरअसल, विरोध का कारण था कि भारत सरकार के द्वारा कई विपक्षी दलों के नेताओं के कश्मीर जाने की इजाजत नहीं दी गई थी लेकिन इन सांसदों को ये मौका मिला, ऐसे में कांग्रेस ने सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए थे ।



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